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भागवत बोले- जरूरतमंदों की सेवा भारत की पहचान

by admin@bebak24.com on | 2026-08-31 12:56:53

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भागवत बोले- जरूरतमंदों की सेवा भारत की पहचान

टोरंटो | बेबाक24 न्यूज़

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में भारतीय संस्कृति, सेवा और विश्वबंधुत्व को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय किसी की सहायता करना भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है और भारत ने संकट में पड़े लोगों की मदद से कभी मुंह नहीं मोड़ा।

‘हिंदू विश्व बंधु’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारतीय दृष्टि समूचे विश्व को एक परिवार मानती है। उनके अनुसार मनुष्य के रंग, रूप, भाषा और परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन मानवता की मूल भावना समान है। इसी कारण दूसरों के प्रति सम्मान और सेवा का भाव भारतीय जीवन-दृष्टि में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

महाशक्ति बनने की दौड़ में भारत नहीं

भागवत ने कहा कि भारत को बड़ी शक्ति के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन देश का उद्देश्य केवल महाशक्ति बनना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान दुनिया पर प्रभुत्व कायम करने से नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति और सेवा के माध्यम से बनी है।

उन्होंने प्राचीन भारत के यात्रियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय लोग दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचे, लेकिन उनका उद्देश्य दूसरे देशों पर कब्जा करना नहीं था। ज्ञान, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और जीवन-मूल्यों का आदान-प्रदान उनकी यात्राओं का प्रमुख आधार रहा।

हिंदू पहचान किसी एक पद्धति तक सीमित नहीं

भागवत ने कहा कि हिंदू पहचान को किसी एक भाषा, पूजा-पद्धति या जीवनशैली में बांधना उचित नहीं है। भारत में अनेक धार्मिक परंपराएं, भाषाएं, समुदाय और सामाजिक समूह सदियों से साथ रहे हैं।

उन्होंने विविधता को भारतीय समाज की शक्ति बताते हुए कहा कि अलग-अलग परंपराओं के बीच मौजूद मूल एकता को समझना जरूरी है। उनके अनुसार भिन्नताएं समाप्त करना एकता की शर्त नहीं है।

संकट में पड़े लोगों को भारत ने दी शरण

संघ प्रमुख ने कहा कि इतिहास में जब भी विभिन्न समुदायों को उत्पीड़न और संकट का सामना करना पड़ा, भारत ने उन्हें आश्रय देने की परंपरा निभाई। उन्होंने कहा कि भारत में कई ऐसे समुदाय आज भी रहते हैं जिन्होंने अपनी अलग पहचान और परंपराओं को बनाए रखा है।

उन्होंने कहा कि दूसरों की सहायता किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना मानवीय संवेदना का स्वाभाविक विस्तार है।

कनाडा-भारत रिश्तों में नई ऊर्जा की उम्मीद

कार्यक्रम में कनाडा और भारत के संबंधों पर भी चर्चा हुई। भारतीय मूल के लोगों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कनाडा के पूर्व रक्षा मंत्री और अल्बर्टा के पूर्व प्रीमियर जेसन केनी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

केनी ने भारत-कनाडा संबंधों में हाल के सुधार का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित कनाडा यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते संवाद से जोड़कर देखा। कार्यक्रम के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों में भी उत्साह दिखाई दिया।

भागवत ने अपने संबोधन में सेवा, सह-अस्तित्व और विश्वबंधुत्व को भारतीय संस्कृति की प्रमुख विशेषताओं के रूप में रेखांकित किया। उनका संदेश रहा कि भारत की पहचान केवल अपनी शक्ति में नहीं, बल्कि अपने आचरण और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी में भी है।



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