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टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस, 7 दिन में देना होगा जवाब

by on | 2026-08-26 14:42:16

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टीएमसी के 20 बागी सांसदों को नोटिस, 7 दिन में देना होगा जवाब

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोकसभा सचिवालय ने इन सांसदों को दलबदल विरोधी कानून के तहत नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं के बाद हुई है।

इन सांसदों पर आरोप है कि उन्होंने टीएमसी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) का हिस्सा बनने का फैसला किया। टीएमसी का दावा है कि यह कदम स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है और संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत उनकी सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए। वहीं, बागी सांसद अपने कदम को वैध राजनीतिक विलय बता रहे हैं।

25 अगस्त को जारी हुआ नोटिस

लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिस की तारीख 25 अगस्त 2026 है। इसके साथ अभिषेक बनर्जी की 18 जून 2026 को दायर अयोग्यता याचिकाओं की प्रतियां भी सांसदों को भेजी गई हैं। नोटिस लोकसभा सदस्यों की दलबदल के आधार पर अयोग्यता नियम, 1985 के नियम 6 के तहत जारी किए गए हैं। सांसदों से याचिकाओं पर अपनी टिप्पणी और जवाब 7 दिनों के भीतर देने को कहा गया है।

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से लंबित याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से फैसला कराने की मांग को लेकर शीर्ष अदालत का रुख किया था। 25 अगस्त को सुनवाई के दौरान अदालत ने बागी सांसदों को नोटिस जारी किया।

सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सांसदों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अहम सवाल केवल नोटिस जारी करने का नहीं, बल्कि अयोग्यता की कार्यवाही को उचित समयसीमा में पूरा करने का है।

क्यों शुरू हुई टीएमसी के भीतर बगावत?

टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों के दूसरे राजनीतिक संगठन के साथ जाने के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं दाखिल कीं। बागी सांसदों को संसद में एनसीपीआई समूह के तौर पर माना गया है और वे एनडीए की संसदीय गतिविधियों में भी भाग लेते रहे हैं। इस घटनाक्रम ने लोकसभा में राजनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।

अब आगे क्या होगा?

अब 20 सांसदों को नोटिस का जवाब देना होगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता की कार्यवाही आगे बढ़ेगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर भी नजर रहेगी। फिलहाल यह मामला केवल टीएमसी की अंदरूनी बगावत तक सीमित नहीं है, बल्कि दलबदल विरोधी कानून के तहत सांसदों की अयोग्यता और संसदीय कार्यवाही की समयसीमा का महत्वपूर्ण कानूनी सवाल भी बन गया है।

बेबाक24 निष्कर्ष: लोकसभा सचिवालय के नोटिस ने टीएमसी के बागी सांसदों के मामले को निर्णायक मोड़ पर ला दिया है। अब 7 दिनों में आने वाले जवाब और उसके बाद होने वाली कार्यवाही से तय होगा कि यह राजनीतिक बगावत संवैधानिक रूप से कितनी बड़ी कीमत चुकाती है।



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