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दिव्या मित्तल का इस्तीफा: वापसी का रास्ता अभी खुला, स्वीकृति से पहले बदल सकती हैं फैसला

by admin@bebak24.com on | 2026-09-01 12:33:54

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दिव्या मित्तल का इस्तीफा: वापसी का रास्ता अभी खुला, स्वीकृति से पहले बदल सकती हैं फैसला

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश की वर्ष 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनकी सेवा में वापसी को लेकर है। नियमों के अनुसार इस्तीफा स्वीकार होने से पहले अधिकारी अपने फैसले पर पुनर्विचार कर वापसी के लिए आवेदन कर सकता है। लेकिन एक बार इस्तीफा स्वीकार हो जाने के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा में लौटने का रास्ता बंद हो जाता है।

दिव्या मित्तल का त्यागपत्र सोमवार को उत्तर प्रदेश के नियुक्ति विभाग को प्राप्त हुआ। इसमें उन्होंने पारिवारिक और निजी कारणों का हवाला दिया है। अब त्यागपत्र को आगे की प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा, क्योंकि अंतिम निर्णय केंद्र के स्तर पर होना है।

इस्तीफा स्वीकार होने तक क्या है विकल्प?

पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के अनुसार, आईएएस अधिकारी का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से अंतिम नहीं माना जाता। इसे स्वीकार किए जाने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है। इस अवधि में अधिकारी अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सेवा में बने रहने या वापस लौटने का अनुरोध कर सकता है।

यानी दिव्या मित्तल के मामले में फिलहाल वापसी की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। लेकिन उनका इस्तीफा यदि केंद्र सरकार की ओर से स्वीकार कर लिया गया, तो इसके बाद सेवा में लौटना संभव नहीं होगा।

कन्नन गोपीनाथन का मामला क्यों अहम?

सेवा से इस्तीफा देने के बाद वापसी की संभावना को समझने के लिए कन्नन गोपीनाथन का मामला उल्लेखनीय है। उन्होंने वर्ष 2019 में आईएएस सेवा से इस्तीफा दिया था, लेकिन उनका त्यागपत्र अब तक स्वीकार नहीं हुआ।

इस्तीफा देने के बाद भी उनका सरकारी सेवा से संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। उन्होंने हाल में स्वयं इस स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्तीफा दिए कई वर्ष बीत जाने के बावजूद वह सेवा में लौटने की स्थिति में हैं।

यह उदाहरण बताता है कि त्यागपत्र देना और उसका औपचारिक रूप से स्वीकार होना दो अलग-अलग चरण हैं।

शाह फैसल और अनीश शेखर की मिसाल भी सामने

जम्मू-कश्मीर के चर्चित आईएएस अधिकारी शाह फैसल ने भी इस्तीफा देकर राजनीति में कदम रखा था। हालांकि उनका त्यागपत्र तत्काल स्वीकार नहीं हुआ। बाद में उन्होंने सेवा में वापसी के लिए आवेदन किया और कुछ वर्षों बाद फिर प्रशासनिक सेवा में लौट आए।

तमिलनाडु संवर्ग के वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी अनीश शेखर ने वर्ष 2024 में निजी कारणों से इस्तीफा दिया था। उसी वर्ष उनका सेवा में पुनः प्रवेश हो गया।

इन मामलों से स्पष्ट है कि त्यागपत्र और उसकी स्वीकृति के बीच की अवधि अधिकारी के लिए निर्णायक होती है।

शशिकांत सेंथिल ने इस्तीफे के बाद चुनी राजनीति

तमिलनाडु संवर्ग के आईएएस अधिकारी शशिकांत सेंथिल ने भी वर्ष 2019 में सेवा से इस्तीफा दिया था। उनके त्यागपत्र को स्वीकार होने में लगभग 3 वर्ष लगे। इसके बाद उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना और लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

महाराष्ट्र के 2008 बैच के आईएएस अधिकारी दौलत देसाई का मामला भी इसी तरह चर्चा में रहा, जहां त्यागपत्र दिए जाने के बावजूद उसकी स्वीकृति लंबी प्रक्रिया में रही।

उत्तर प्रदेश में बढ़ रहा सेवा छोड़ने का सिलसिला

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश के कई आईएएस अधिकारियों ने सेवा से दूरी बनाई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 9 अधिकारियों ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली, जबकि 4 अधिकारियों ने इस्तीफा दिया।

इनमें कुछ अधिकारी निजी क्षेत्र की ओर गए तो कुछ ने राजनीति में प्रवेश किया। ऐसे में दिव्या मित्तल का इस्तीफा भी प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब केंद्र के फैसले पर टिकी नजर

दिव्या मित्तल का त्यागपत्र अब केंद्र सरकार के स्तर पर जाएगा। वहां इसकी जांच और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम निर्णय होगा।

इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दिव्या मित्तल हमेशा के लिए प्रशासनिक सेवा से बाहर हो चुकी हैं। जब तक त्यागपत्र स्वीकार नहीं होता, उनके लिए वापसी की संभावना बनी हुई है। निर्णायक मोड़ अब केंद्र सरकार की स्वीकृति होगी।



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