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जब झूमीं काली गाड़ियाँ, तो मची खलबली: बाबा के दरबार में योगी संग बाहुबली!

by admin@bebak24.com on | 2025-11-06 17:33:43

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जब झूमीं काली गाड़ियाँ, तो मची खलबली: बाबा के दरबार में योगी संग बाहुबली!

जब झूमीं काली गाड़ियाँ, तो मची खलबली: बाबा के दरबार में बाबा संग बाहुबली!


काशी/वाराणसी: देव दीपावली के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का काशी आगमन और बाबा विश्वनाथ का दर्शन स्वाभाविक था, लेकिन इस दौरान कुछ 'बाहुबली' नेताओं की मौजूदगी और उनके गाड़ियों के काफिले का रौद्र रूप, सरकार के 'माफिया उन्मूलन' के नारे पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुँचे, सड़कों पर दर्जनों काली गाड़ियाँ एक ख़ास अंदाज में गुजरती दिखीं—एक ऐसा दृश्य जिसने स्थानीय व्यापारियों और आम जनता के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया।

> "जब झूमती हैं काली गाड़ियाँ, तो मचती है खलबली। बाबा के दरबार में बाबा संग होते ही है  बाहुबली!"


यह घटना दर्शाती है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद, पूर्वांचल की राजनीति में बाहुबलियों की धाक बरकरार है, भले ही वे अब सत्ताधारी पार्टी (भाजपा) के छत्रछाया में हों।


 भयमुक्त समाज के नारे पर 'कालिख': बाहुबलियों की उपस्थिति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा माफिया और बाहुबलियों के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति की बात करते हैं। लेकिन बाबा विश्वनाथ धाम के पास  ये दो प्रमुख चेहरे सीएम के साथ अक्सर देखें जाते हैं —जिनका अतीत और वर्तमान राजनीतिक व बाहुबली ताक़त से जुड़ा है—इस नीति पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं:

 * सुशील सिंह (चंदौली, सैयदराजा विधायक): माफिया बृजेश सिंह के भतीजे।

 * विशाल सिंह 'चंचल' (गाजीपुर MLC): माफिया मुख्तार अंसारी के गुट से जुड़े माने जाते रहे हैं और अब भाजपा से एमएलसी हैं।

 * बृजेश सिंह के करीबी: बाहुबली बृजेश सिंह के प्रभाव वाले लोग भी काफिले में दिखे।


स्थानीय लोगों का मानना है कि जब दर्जनों काली और एक ही नंबर की गाड़ियाँ मुख्यमंत्री के आसपास 'झुकती हुई' बाबा के दरबार तक पहुँचती हैं, तो यह न केवल 'भय मुक्त समाज' के नारे के मुंह पर कालिख पोतती है, बल्कि व्यापारियों और आम नागरिकों में पुरानी दहशत को भी बढ़ाती है।


 बाहुबली नेताओं का विस्तृत प्रोफाइल


1. सुशील सिंह

 * पद: भारतीय जनता पार्टी (BJP) से चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा से वर्तमान विधायक (लगातार चौथी बार विधायक)दबदबा इतना कि चार बार में तीन बार बदला क्षेत्र।

 * पहचान: पूर्वांचल के बड़े माफिया और एमएलसी बृजेश सिंह के भतीजे हैं।

 * पृष्ठभूमि: राजनीतिक करियर की शुरुआत बसपा से हुई थी, जिसके बाद वह निर्दलीय भी रहे और वर्तमान में भाजपा से हैं। उनके ऊपर हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, हालांकि वह कुछ मामलों में बरी भी हुए हैं। उनके विरोधी अक्सर उनके राजनीतिक सफर में बाहुबल के प्रभाव का आरोप लगाते रहे हैं।


2. विशाल सिंह 'चंचल'

 * पद: भारतीय जनता पार्टी (BJP) से गाजीपुर के MLC (स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र से)। वह दूसरी बार एमएलसी बने हैं।

 * पहचान: अंसारी बंधुओं के खास और पूर्वांचल के एक प्रभावशाली ठाकुर नेता माने जाते हैं।

 * पृष्ठभूमि: राजनीति में आने से पहले उनके परिवार का मुख्य व्यवसाय ठेका और टायर की दुकान का व्यापार था। 2012 में निर्दलीय अंसारी बंधुओं के सहयोग से MLC बने और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। हालांकि उनकी सीधी आपराधिक पृष्ठभूमि कम बताई जाती है, लेकिन गाजीपुर की बाहुबली राजनीति में उनकी पकड़ और प्रभाव बेहद मजबूत है, जिसके कारण उनकी गिनती पूर्वांचल के प्रभावशाली नेताओं में होती है।

यह घटना दिखाती है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपराधीकरण की जड़ें कितनी गहरी हैं, जहाँ 'माफिया राज' समाप्त करने का दावा करने वाली पार्टी भी, अपने राजनीतिक हितों के लिए दागी और बाहुबली पृष्ठभूमि के नेताओं को उच्च पदों पर बनाए रखती है।



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