by admin@bebak24.com on | 2025-11-12 19:48:38
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गाजीपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व नेता और अब भाजपाई बन चुके डॉ. सानंद सिंह का राजनीतिक सफर हमेशा गाजीपुर के अंसारी बंधुओं के निशाने पर रहा है। विशेषकर जहूराबाद और एमएलसी चुनावों में उन्हें सपा के भीतर से ही भितरघात और अंसारी परिवार के सीधे हस्तक्षेप का सामना करना पड़ा।
2007: जहूराबाद में नाची '786', पंचर हुई साइकिल
बात 2007 के विधानसभा चुनाव की है। सपा ने डॉ. सानंद सिंह को जहूराबाद से अपना प्रत्याशी बनाया था। सानंद सिंह के पिता स्व. सत्यदेव सिंह भी खांटी समाजवादी थे, और एमएलसी काशीनाथ यादव के करीबी थे इसलिए पार्टी ने उन पर भरोसा जताया।
लेकिन सानंद सिंह को अपने ही दल में विरोध झेलना पड़ा। उनके अनुसार, सपा में रहते हुए अंसारी बंधुओं के कहने पर एक गुट ने उनके ख़िलाफ़ काम किया। अंसारी बंधुओं के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार शिवपूजन चौहान का चुनाव निशान 'जहाज' (जिसे '786' कहा गया) खूब चला। बता दें कि माफिया मुख्तार अंसारी के की 0786 गाड़ीयों का काफिला जैसे ही जहुराबाद में घूमा कि साइकिल की हवा निकल गयी ।
> परिणाम: इस भितरघात और ध्रुवीकरण के चलते युवा चेहरा डॉ. सानंद सिंह चुनाव हार गए। सानंद सिंह इस हार को आज भी अपनी 'नियति' मानते हैं और कहते हैं कि इसी घटना से उनका सपा से मोहभंग शुरू हुआ था।
2016 एमएलसी चुनाव: जब मुख्तार ने हांका चंचल का रथ
2016 में जब सपा ने डॉ. सानंद सिंह को एमएलसी का टिकट दिया, तो अंसारी बंधुओं ने एक बार फिर उन्हें निशाना बनाया।
बसपा का पैंतरा: बसपा ने राजदेव सिंह को टिकट दिया था, जो विशाल सिंह चंचल के चाचा थे।
मुख्तार अंसारी का दांव: मुख्तार अंसारी, जो उस समय स्वयं जेल में थे, ने युवा डॉ. सानंद सिंह को मैदान में देख पैंतरा बदला।
उन्होंने विशाल सिंह चंचल को कौमी एकता दल (QED) समर्थित उम्मीदवार के रूप में गाजीपुर से मैदान में उतार दिया।
चंचल के इस रथ पर अंसारी बंधु सवार हुए, जबकि सानंद सिंह के रथ पर तत्कालीन कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सिंह सवार थे।
भाजपा ने इस मुकाबले में एक ठेकेदार को टिकट दिया, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया।
परिणाम: इस कांटे के मुकाबले में अंसारी बंधुओं का दल भारी पड़ा और विशाल सिंह चंचल को जीत मिली।
सियासत की नई बिसात: अब 'दोनों' भाजपाई
समय का चाणक्य कहे जाने वाले मुख्तार अंसारी ने प्रदेश में योगी सरकार के बाद खुद पंजाब का रुख किया और विशाल सिंह चंचल भी भाजपा में शामिल हो गए।
अब डॉ. सानंद सिंह भी भाजपाई हैं। आने वाले समय में एमएलसी चुनाव में फिर से जोर आजमाईश होगी। इस बार चर्चा है कि सानंद सिंह को स्वर्गीय कृष्णानंद राय के पुत्र पीयूष राय की लाबी का साथ हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जब भाजपा में ही '786' के खिलाफ 'कमल' का फूल होगा, तो गाजीपुर की बिसात पर कौन बाजी मारता है।
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