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अलविदा 'शांति की मसीहा': ब्रह्माकुमारीज़ की सुरेन्द्र दीदी का महाप्रयाण; काशी से काठमांडू तक शोक की लहर

by on | 2026-03-06 20:58:03

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अलविदा 'शांति की मसीहा': ब्रह्माकुमारीज़ की सुरेन्द्र दीदी का महाप्रयाण; काशी से काठमांडू तक शोक की लहर


वाराणसी | बेबाक 24 ब्यूरो रिपोर्ट: अध्यात्म डेस्क

वाराणसी। विश्व शांति और आध्यात्मिक चेतना की प्रखर ज्योति, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के बनारस एवं पश्चिम नेपाल सबज़ोन की प्रभारी राजयोगिनी सुरेन्द्र दीदी शुक्रवार सुबह 09:10 बजे अनंत यात्रा पर निकल गईं। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अपनी देह त्याग दी। उनके निधन से न केवल ब्रह्माकुमारी परिवार, बल्कि समूचे आध्यात्मिक जगत में एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना नामुमकिन है।

प्रमुख कार्य: केवल नाम नहीं, सेवा का एक अध्याय थीं दीदी

​सुरेन्द्र दीदी का जीवन केवल प्रवचनों तक सीमित नहीं था, उन्होंने धरातल पर जो कार्य किए, वे उनकी विरासत को अमर बनाते हैं:

  • काशी-नेपाल मैत्री सेतु: उन्होंने बनारस और नेपाल के बीच आध्यात्मिक सेतु का निर्माण किया। विशेषकर पश्चिम नेपाल के दुर्गम क्षेत्रों में मूल्यों की शिक्षा और राजयोग केंद्रों की स्थापना कर हजारों युवाओं को व्यसन मुक्त बनाया।
  • नारी सशक्तिकरण की मिसाल: दीदी ने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ी महिलाओं को आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ जीना सिखाया। उनके नेतृत्व में सैकड़ों 'बीके' बहनों ने समाज सेवा का संकल्प लिया।
  • जेल सुधार कार्यक्रम: वाराणसी सहित पूर्वांचल की जेलों में कैदियों के मानसिक रूपांतरण के लिए उन्होंने विशेष ध्यान शिविरों का आयोजन किया, जिससे सैकड़ों अपराधियों ने अपराध का रास्ता छोड़ सामान्य जीवन अपनाया।
  • तनावमुक्त समाज का निर्माण: उन्होंने प्रशासन, पुलिस और शिक्षा जगत के लिए 'स्ट्रेस फ्री लिविंग' वर्कशॉप्स के माध्यम से कार्यकुशलता बढ़ाने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किए।

रविवार को होगी अंतिम विदाई: सारनाथ में जुटेगा जनसैलाब

​दीदी के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए सारनाथ स्थित क्षेत्रीय मुख्यालय में रखा जाएगा।

  • अंतिम यात्रा: रविवार, 08 मार्च 2026, सुबह 10:00 बजे।
  • मार्ग: सारनाथ से हरिश्चन्द्र घाट।
  • अंतिम संस्कार: मोक्षदायिनी गंगा के तट पर हरिश्चन्द्र घाट पर दीदी को अंतिम विदाई दी जाएगी।
  • ​"दीदी ने काशी के घाटों से लेकर नेपाल की चोटियों तक शांति का जो शंखनाद किया, वह युगों तक गूंजता रहेगा। उन्होंने ईश्वरीय सेवा को अपना श्वास बना लिया था।" — बीके अनुयायी


     बेबाक 24 इस महान विभूति को शत-शत नमन करता है। उनकी सौम्य मुस्कान और शांति का संदेश मानवता के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।



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