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सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत लौटी अपनी विरासत, बुद्ध के अवशेष मात्र कलाकृतियां नहीं: पीएम मोदी

by on | 2026-01-03 15:26:39

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सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत लौटी अपनी विरासत, बुद्ध के अवशेष मात्र कलाकृतियां नहीं: पीएम मोदी


नई दिल्ली | विशेष संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के ऐतिहासिक राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध के पावन पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी 'द लाइट एंड द लोटस' का उद्घाटन किया। इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि 127 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत की यह अमूल्य धरोहर स्वदेश वापस लौटी है।

2026 का पहला सार्वजनिक कार्यक्रम बुद्ध के चरणों में

​पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा, "2026 की शुरुआत में ही यह शुभ उत्सव बहुत प्रेरणादायी है। मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि साल का मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम भगवान बुद्ध के चरणों से शुरू हो रहा है।" उन्होंने कामना की कि बुद्ध का आशीर्वाद दुनिया में शांति और समृद्धि लेकर आए।

गुलामी ने हमारी विरासत को छीना

​पिछली सरकारों और औपनिवेशिक काल पर कटाक्ष करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी ने न केवल देश को बल्कि हमारी विरासत को भी नष्ट किया। उन्होंने कहा, "सवा सौ साल पहले इन पवित्र अवशेषों को भारत से छीन लिया गया था। जो इन्हें ले गए, वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी नीलामी की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमारे लिए ये केवल 'एंटीक' या कलाकृतियां नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता का अविभाज्य हिस्सा और पूजनीय विरासत हैं। इसलिए हमने इनकी नीलामी रुकवाकर इन्हें वापस लाने का संकल्प लिया।"

बुद्ध का मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव

​प्रधानमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत आस्था का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान बुद्ध का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है।

  • जन्मभूमि: "मेरा जन्म जिस वडनगर में हुआ, वह प्राचीन काल में बौद्ध शिक्षा का एक बड़ा केंद्र था।"
  • कर्मभूमि: "आज मेरी कर्मभूमि काशी (सारनाथ) है, जहां बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था।"

मुख्य आकर्षण: 127 साल बाद हुआ मिलन

​इस प्रदर्शनी में पहली बार 1898 में खोजे गए उन अवशेषों को एक साथ रखा गया है जो एक सदी से भी अधिक समय बाद विदेश से वापस लाए गए हैं। इनके साथ ही राष्ट्रीय संग्रहालय (नई दिल्ली) और भारतीय संग्रहालय (कोलकाता) में सुरक्षित रखे गए अवशेषों को भी प्रदर्शित किया गया है।

सरकार के बड़े कदम:

  • पालि भाषा: पीएम ने बताया कि बुद्ध की शिक्षाओं की मूल भाषा 'पालि' को अब शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया है।
  • बुद्धिस्ट सर्किट: देशभर में बौद्ध तीर्थस्थलों को जोड़ने के लिए आधुनिक कनेक्टिविटी पर काम जारी है।



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