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भागवत बोले- विविधता का सम्मान ही हिंदू पहचान का मूल

by admin@bebak24.com on | 2026-08-31 12:56:18

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भागवत बोले- विविधता का सम्मान ही हिंदू पहचान का मूल

टोरंटो | बेबाक24 न्यूज़

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कनाडा में हिंदू पहचान को लेकर व्यापक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि हिंदू होने का संबंध किसी एक भाषा, पूजा-पद्धति या जीवनशैली से नहीं है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग परंपराएं और सामाजिक विविधताएं मानव जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं, जबकि इनके पीछे एक मूलभूत एकता मौजूद रहती है।

ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र में आयोजित एक सभा में भागवत ने कहा कि हिंदू परंपरा विविधताओं को समाप्त करने के बजाय उन्हें स्वीकार करने और सम्मान देने की बात करती है। उनके अनुसार भारत की सभ्यतागत दृष्टि ने लोगों को बाहरी भिन्नताओं के साथ-साथ उनके पीछे मौजूद साझा मानवीय आधार को पहचानना सिखाया है।

विविधता में नहीं, विविधता के पीछे एकता

भागवत ने कहा कि भारत में अनेक जातियां, भाषाएं, धर्म, परंपराएं और जीवन पद्धतियां रही हैं। इन भिन्नताओं के बावजूद समाज की मूल एकता बनी रहती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्वरूपों को स्वीकार करना ही भारतीय दृष्टि की विशेषता है।

उन्होंने समझाया कि विविधता को समस्या मानने के बजाय उसे एक व्यापक एकता की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह विविधता समाज को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसे अधिक समृद्ध और सुंदर बनाती है।

पूरी धरती एक परिवार

भागवत ने मानवता को एक परिवार मानने की भावना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को दुनिया को अपने और पराए के खांचे में नहीं बांटना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति के प्रति सम्मान और संवेदना का भाव होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि जरूरतमंद की सहायता करना किसी एक समुदाय की विशेषता नहीं, बल्कि मानव स्वभाव की स्वाभाविक संवेदना है। भूखे व्यक्ति के सामने स्वयं भोजन करते हुए उसकी पीड़ा को अनदेखा करना सहज नहीं है। इसी मानवीय भावना से सेवा और सहयोग की प्रवृत्ति जन्म लेती है।

सिद्धांत थोपने के बजाय आचरण से उदाहरण

संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदू समाज को अपने विचार दूसरों पर थोपने के बजाय अपने व्यवहार और आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उनके अनुसार नेतृत्व का सबसे प्रभावी तरीका दूसरों को आदेश देना नहीं, बल्कि स्वयं ऐसा आचरण करना है जिसे लोग उदाहरण के रूप में देख सकें।

उन्होंने कहा कि मानव जीवन में बाहरी परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन मनुष्य की मूल एकता स्थायी रहती है। इसी समझ के आधार पर समाज में आपसी सम्मान, सेवा और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

कनाडा में भारतीय समुदाय की बड़ी मौजूदगी

कार्यक्रम में कनाडा के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू समुदाय से जुड़े लोग, धार्मिक प्रतिनिधि, विद्वान, पेशेवर और विभिन्न संस्थाओं के सदस्य शामिल हुए। भागवत का संबोधन मुख्य रूप से सांस्कृतिक विविधता, मानवीय एकता और सेवा भावना पर केंद्रित रहा।

उन्होंने कहा कि दुनिया को बांटने वाले भेदों के बजाय मानवता को जोड़ने वाले मूल्यों पर जोर दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक यही दृष्टि समाज और विश्व में अधिक सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार कर सकती है।



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