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जहाजों वाला गांव: धनियामऊ में 21 जहाज, 100 से ज्यादा कंपनियां

by admin@bebak24.com on | 2026-08-31 11:58:55

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जहाजों वाला गांव: धनियामऊ में 21 जहाज, 100 से ज्यादा कंपनियां

जौनपुर | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश के जौनपुर का धनियामऊ गांव अपनी खेती या पारंपरिक कारोबार के लिए नहीं, बल्कि समुद्री जहाजों से जुड़े कारोबार और रोजगार के लिए पहचान बना रहा है। दो हजार से अधिक आबादी वाले इस गांव के बड़ी संख्या में लोग जहाजों के निर्माण, मरम्मत और संचालन से जुड़े हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव से जुड़े लोगों के पास 21 पानी के जहाज और 100 से अधिक जहाजरानी कंपनियां हैं।

धनियामऊ को स्थानीय स्तर पर ‘जहाज वाला गांव’ कहा जाता है। गांव के कई परिवारों के सदस्य मुंबई और देश के अन्य हिस्सों में रहकर जहाजरानी क्षेत्र में काम करते हैं। जिले के अन्य गांवों को मिलाकर तीन हजार से अधिक लोग इस क्षेत्र में रोजगार से जुड़े होने का दावा किया जाता है।

एक परिवार से शुरू हुआ रोजगार का सिलसिला

स्थानीय लोगों के मुताबिक धनियामऊ में जहाजरानी से जुड़ने की शुरुआत करीब आठ दशक पहले हुई। गांव के भोला नाथ मिश्रा ने पहले गुजरात की एक कंपनी में काम किया और वहां जहाजों से संबंधित काम सीखा। इसके बाद वर्ष 1948 में उन्होंने अपनी यांत्रिक कंपनी शुरू की।

बताया जाता है कि उन्होंने गांव और रिश्तेदारी के युवाओं को मुंबई ले जाकर काम सिखाया। धीरे-धीरे कई परिवार इस कारोबार से जुड़ते चले गए और जहाजरानी रोजगार का बड़ा माध्यम बन गया।

युवाओं को विदेशों में भी मिल रहा रोजगार

धनियामऊ के लोगों के अनुसार, अब इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश के युवाओं की अच्छी भागीदारी है। बनारस और आसपास के क्षेत्रों में निजी प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवा जहाजरानी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षण भी ले रहे हैं।

योग्यता और पद के अनुसार इस क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को विदेशों में अच्छी आय मिलती है। गांव के लोगों का कहना है कि जहाजों पर काम करने वाले कई युवा अलग-अलग देशों में लगातार आते-जाते रहते हैं।

गांव में 100 से अधिक अभियंता

आर्थिक रूप से मजबूत हो चुके धनियामऊ में शिक्षा का स्तर भी तेजी से बढ़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक गांव में 100 से अधिक युवा बीटेक कर चुके हैं और अलग-अलग कंपनियों में कार्यरत हैं।

गांव में प्राथमिक विद्यालय से लेकर महाविद्यालय तक शैक्षणिक सुविधाएं मौजूद हैं। युवाओं के साथ गांव की महिलाओं की शिक्षा पर भी जोर बढ़ा है। कई परिवार रोजगार के कारण मुंबई और दूसरे शहरों में रहते हैं, लेकिन धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में गांव लौटते हैं।

आसपास के गांवों में भी बढ़ा असर

धनियामऊ के अलावा जौनपुर के दूसरे गांवों में भी जहाजरानी क्षेत्र का प्रभाव बढ़ा है। उमरछा गांव के कई युवा विदेशों में रोजगार के लिए जाते हैं। वहीं, बदलापुर तहसील के तिलवारी गांव के 500 से अधिक लोग जहाजरानी क्षेत्र में विभिन्न पदों पर काम कर रहे हैं।

इनमें तकनीकी कर्मचारी, अभियंता, चालक दल के सदस्य, सुरक्षा कर्मी, फिटर, पंपकर्मी और अधिकारी स्तर के कर्मचारी शामिल हैं।

पासपोर्ट बनवाना भी गांव की पहचान

धनियामऊ में विदेश यात्रा और जहाजरानी रोजगार की वजह से पासपोर्ट रखने वालों की संख्या भी काफी अधिक बताई जाती है। ग्राम प्रधान के अनुसार, दो हजार से अधिक आबादी वाले गांव में 1000 से ज्यादा लोगों के पासपोर्ट होने का दावा है।

गांव के लोगों का कहना है कि यहां कई युवा रोजगार की तलाश में पहले पासपोर्ट बनवाने की तैयारी करते हैं और बाद में विदेश या जहाजरानी क्षेत्र में अवसर तलाशते हैं।

खेती के लिए पहचाने जाने वाले पूर्वांचल के एक गांव की यह कहानी बताती है कि सही कौशल, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलने पर ग्रामीण युवा समुद्र पार तक अपनी पहचान बना सकते हैं।



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