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बिहार में फिर अभ्यर्थियों का हंगामा: असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों का लोकभवन मार्च, बैरिकेडिंग तोड़ी; बेली रोड पर पुलिस से झड़प

by on | 2026-08-22 16:04:31

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बिहार में फिर अभ्यर्थियों का हंगामा: असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों का लोकभवन मार्च, बैरिकेडिंग तोड़ी; बेली रोड पर पुलिस से झड़प

पटना | बेबाक24 न्यूज़

बिहार की राजधानी पटना में शनिवार को असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों के लोकभवन मार्च के दौरान एक बार फिर तनाव की स्थिति बन गई। सहायक प्राध्यापक भर्ती की नई नियमावली के विरोध में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच बेली रोड पर झड़प हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी, जिसे अभ्यर्थियों ने तोड़ दिया। इसके बाद सड़क पर काफी देर तक हंगामा चलता रहा और यातायात प्रभावित हुआ।

19 दिन से आमरण अनशन पर अभ्यर्थी

‘ऑल पीएचडी होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले अभ्यर्थी पिछले 19 दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन कर रहे हैं। संगठन ने शनिवार को गर्दनीबाग से लोकभवन तक मार्च निकालने का एलान किया था।

मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने रास्ते में कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की। प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे और इसी दौरान बेली रोड पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. कुंदन कुमार ने दावा किया कि आमरण अनशन पर बैठे 3 में से 2 शोधार्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

नई नियुक्ति नियमावली का विरोध क्यों?

अभ्यर्थियों का मुख्य विरोध बिहार सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 को लेकर है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था बिहार के छात्रों और शोधार्थियों के हित में नहीं है और इससे उच्च शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

प्रदर्शनकारियों के अनुसार बिहार के विश्वविद्यालयों में करीब 30 वर्षों में केवल 3 बार सहायक प्राध्यापकों की नियमित बहाली हुई है। ऐसे में उनका आरोप है कि स्थायी नियुक्ति को बढ़ावा देने के बजाय संविदा आधारित व्यवस्था की ओर जाना उचित नहीं है।

उम्र सीमा 55 से घटाकर 40 करने पर आपत्ति

अभ्यर्थियों ने नई नियमावली में अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष से घटाकर 40 वर्ष किए जाने पर भी विरोध जताया है।

उनका कहना है कि लंबे समय से अतिथि शिक्षक के रूप में काम कर रहे कई अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा घटने से नियमित नियुक्ति का अवसर समाप्त हो सकता है। संगठन उम्र सीमा को दोबारा 55 वर्ष किए जाने की मांग कर रहा है।

शोध प्रकाशनों के अंक हटाने का भी विरोध

अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया में शोध प्रकाशनों से जुड़े अंकों को हटाने पर भी आपत्ति जताई है।

उनका कहना है कि पिछली नियुक्ति प्रक्रिया में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के तालिका 3ए के तहत शोध प्रकाशनों के लिए 10 अंक निर्धारित थे। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि शोध और अकादमिक उपलब्धियों को फिर से नियुक्ति प्रक्रिया में उचित महत्व दिया जाए।

स्थायी नियुक्ति की मांग

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के तालिका 3ए के आधार पर स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि राज्य में लंबे समय से सहायक प्राध्यापकों की पर्याप्त भर्ती नहीं हुई है, जिसका सीधा असर उच्च शिक्षा और शोध व्यवस्था पर पड़ रहा है।

पप्पू यादव ने दिया अभ्यर्थियों को समर्थन

सांसद पप्पू यादव भी आंदोलन स्थल पहुंचे और अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शोधार्थी शिक्षा और ज्ञान व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को आंदोलन या विरोध के रूप में देखने के बजाय सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए।

उन्होंने सरकार से तत्काल वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की और कहा कि शोधार्थियों के अधिकार, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।

सरकार से बातचीत की मांग

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित समाधान नहीं मिला है। इसी वजह से उन्होंने लोकभवन तक मार्च निकालने का फैसला किया।

फिलहाल प्रदर्शन के कारण बेली रोड पर यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

बेबाक24 का नजरिया

सहायक प्राध्यापक भर्ती का यह विवाद केवल नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा, शोध और शिक्षक भर्ती व्यवस्था से जुड़ा प्रश्न है। सरकार और अभ्यर्थियों के बीच टकराव बढ़ने के बजाय जरूरी है कि नियमावली की आपत्तियों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा हो और दोनों पक्ष समाधान की ओर बढ़ें।



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