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पानी का तांडव या प्रशासनिक लापरवाही? रिहंद के कपाट खुले, निचले इलाकों पर मंडराया बाढ़ का खतरा!

by on | 2026-09-01 20:54:51

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पानी का तांडव या प्रशासनिक लापरवाही? रिहंद के कपाट खुले, निचले इलाकों पर मंडराया बाढ़ का खतरा!


सोनभद्र (पिपरी):

​कुदरत का कहर कहिए या सिस्टम की मजबूरी, रिहंद बांध में पानी का दबाव इस कदर बढ़ा कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। जलस्तर जैसे ही 872 फीट के खतरे के निशान को छूने लगा, सोमवार दोपहर ठीक 1 बजे आनन-फानन में डैम के गेट संख्या 7 और 8 को पूरी ताकत के साथ खोलना पड़ा।

क्या है जमीनी हकीकत?

  • 18 हजार क्यूसेक का सैलाब: बांध के फाटकों और टरबाइन के जरिए 18 हजार क्यूसेक पानी बेदर्दी से नीचे उकेरा जा रहा है।
  • और खुल सकते हैं फाटक: सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता राजेश शर्मा का साफ कहना है कि पानी की आवक (इनफ्लो) थम नहीं रही है। अगर यही हाल रहा, तो और भी फाटक खोलने में जरा भी देरी नहीं की जाएगी।
  • सोन नदी में उफान, गांव होंगे जलमग्न: रिहंद से छूटा यह पानी ओबरा बांध को लांघते हुए सीधे सोन नदी में तबाही मचाने पहुंचेगा। डाउनस्ट्रीम के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बिल्कुल सिर पर आ खड़ा हुआ है।

​प्रशासन दावा कर रहा है कि निचले इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की नसीहत दी गई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ कागजी अलर्ट जारी कर देने से गांव वालों की जान-माल की हिफाजत हो जाएगी? बाढ़ की आहट के बीच अब देखना यह है कि जमीनी स्तर पर राहत और बचाव के दावे कितने पुख्ता साबित होते हैं!



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