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बुलडोजर का प्रहार: गाजीपुर में पशुचर भूमि पर बना अवैध पक्का निर्माण ज़मींदोज़, कब्जा मुक्त कराई गई सरकारी ज़मीन

by on | 2026-08-30 21:41:34

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बुलडोजर का प्रहार: गाजीपुर में पशुचर भूमि पर बना अवैध पक्का निर्माण ज़मींदोज़, कब्जा मुक्त कराई गई सरकारी ज़मीन

गाजीपुर। सरकारी और सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जा जमाकर हुकूमत चलाने वालों के खिलाफ गाजीपुर जिला प्रशासन का चाबुक एक बार फिर करारा चला है। तहसील सदर के मौजा नसीरुद्दीनपुर में करोड़ों की कीमत वाली पशुचर (चारागाह) भूमि पर काबिज भू-माफिया और अतिक्रमणकारियों के हौसले पस्त करते हुए संयुक्त टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पक्के निर्माण को ध्वस्त कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

मौजा नसीरुद्दीनपुर (परगना-पचोतर) स्थित आराजी संख्या-565, रकबा 0.2690 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में दर्ज पशुचर का खाता है। इस कीमती जमीन के 0.0030 हेक्टेयर और 0.0100 हेक्टेयर हिस्से पर अवैध रूप से पक्का निर्माण कराकर कब्जा जमा लिया गया था।

अदालत का फैसला और प्रशासन का अल्टीमेटम:

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-67 के तहत तहसीलदार सदर न्यायालय में चले वाद के बाद 03 अप्रैल 2025 और 14 अक्टूबर 2025 को बेदखली व भारी क्षतिपूर्ति का आदेश हुआ था। अतिक्रमणकारी ने अपील के जरिए कार्रवाई रोकने का दांव खेला, जिसे सक्षम न्यायालय ने 17 जनवरी 2026 को पूरी तरह खारिज कर दिया। दो-दो बार नोटिस दिए जाने के बावजूद जब कब्जा नहीं हटाया गया, तो प्रशासन ने खुद मौके पर पहुंचकर यह कार्रवाई अमल में लाई।

मौके पर भारी बल, अधिकारियों की सीधी निगरानी:

जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के कड़े निर्देशों पर अपर जिलाधिकारी (भू० रा०) सुनील कुमार त्रिवेदी के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को मलबे में तब्दील कर दिया। कार्रवाई के दौरान उपजिलाधिकारी सदर, क्षेत्राधिकारी, तहसीलदार सदर और प्रभारी निरीक्षक पर्याप्त बल के साथ मुस्तैद रहे। पूरी प्रक्रिया की पल-पल की मॉनिटरिंग मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO) और पुलिस अधीक्षक ग्रामीण (SP Rural) द्वारा की गई।

प्रशासन की साफ चेतावनी:

जिला प्रशासन ने दो टूक शब्दों में संदेश दे दिया है कि ग्राम सभा की आरक्षित श्रेणी की भूमि—चाहे वह पशुचर हो, तालाब हो, रास्ता हो या खलिहान—पर अवैध कब्जा किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। न सिर्फ ऐसे कब्जों को चिन्हित कर ध्वस्त किया जाएगा, बल्कि अतिक्रमण हटाने में आया पूरा खर्च और हर्जाना भी सीधे कब्जाधारकों की जेब से वसूला जाएगा।



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