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यूपी में जयंत की नई चाल, ब्राह्मण वोट पर नजर

by admin@bebak24.com on | 2026-08-29 13:40:23

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यूपी में जयंत की नई चाल, ब्राह्मण वोट पर नजर

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी का लखनऊ दौरा सियासी मायने रखता है। 30 अगस्त को होने वाली संगठनात्मक बैठक में पार्टी की चुनावी रणनीति, बूथ स्तर की तैयारियों और नए सामाजिक समीकरणों पर चर्चा होगी। खास तौर पर ब्राह्मण और अन्य सवर्ण वर्गों को पार्टी से जोड़ने की कवायद पर नजर रहेगी।

राष्ट्रीय लोकदल के पदाधिकारियों के मुताबिक, पार्टी लंबे समय से समाज के अलग-अलग वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर काम कर रही है। लखनऊ के कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज और अन्य सवर्ण वर्गों के कुछ प्रमुख लोगों के पार्टी में शामिल होने की संभावना भी जताई गई है।

ब्राह्मणों पर बढ़ा सियासी फोकस

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले कई राजनीतिक दल इस वर्ग तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

राष्ट्रीय लोकदल का दावा है कि चौधरी चरण सिंह की किसान और सामाजिक न्याय की राजनीति को लेकर ब्राह्मण समाज के एक हिस्से में सकारात्मक माहौल बन रहा है। पार्टी इसी आधार को व्यापक राजनीतिक समर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है।

अखिलेश भी दे चुके हैं संदेश

समाजवादी पार्टी भी ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर सक्रिय दिखाई दे रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल में पार्टी के एक प्रबुद्ध सम्मेलन में 'पीडीए' की अपनी व्याख्या में 'पीडी' को 'पंडित' से जोड़कर ब्राह्मण समाज तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश की।

अखिलेश ने अपने संबोधन में पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र की विरासत का उल्लेख किया और ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। इससे साफ है कि 2027 के चुनाव में सवर्ण मतदाताओं को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ रही है।

जयंत के दौरे का बड़ा संदेश

जयंत चौधरी का लखनऊ दौरा केवल संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं माना जा रहा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट आधार वाली पार्टी अब प्रदेश के दूसरे सामाजिक समूहों में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

ऐसे समय में जब सपा और भाजपा दोनों महिला, पिछड़ा, दलित और सवर्ण मतदाताओं को लेकर अलग-अलग रणनीतियां बना रहे हैं, राष्ट्रीय लोकदल का ब्राह्मण और सवर्ण समाज की ओर बढ़ना चुनावी समीकरणों में एक नई परत जोड़ सकता है।

आगामी विधानसभा चुनाव में यह देखना अहम होगा कि जयंत चौधरी का यह सामाजिक विस्तार कितना प्रभावी साबित होता है और क्या राष्ट्रीय लोकदल अपने पारंपरिक समर्थन आधार से आगे बढ़कर नया राजनीतिक गठजोड़ तैयार कर पाता है।



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