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पंजाब की सियासत में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की दस्तक: नाभा जेल ब्रेक कांड के आरोपी गुरप्रीत सेखों की चुनावी एंट्री की चर्चा

by admin@bebak24.com on | 2026-08-22 15:13:09

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पंजाब की सियासत में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की दस्तक: नाभा जेल ब्रेक कांड के आरोपी गुरप्रीत सेखों की चुनावी एंट्री की चर्चा

चंडीगढ़ | बेबाक24 न्यूज़

पंजाब में प्रस्तावित फरवरी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच आपराधिक मामलों से जुड़े रहे कुछ चेहरों के संभावित राजनीतिक प्रवेश ने नई बहस को जन्म दे दिया है। इस कड़ी में 2016 के चर्चित नाभा जेल ब्रेक मामले के प्रमुख आरोपी गुरप्रीत सिंह सेखों का नाम सामने आया है।

चर्चा है कि जेल से बाहर आने के बाद सामाजिक गतिविधियों के जरिए सार्वजनिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे सेखों जल्द ही किसी राजनीतिक दल में शामिल हो सकते हैं और चुनावी राजनीति में उतर सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक उनके किसी दल में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

नाभा जेल ब्रेक कांड से जुड़ा रहा है नाम

गुरप्रीत सिंह सेखों का नाम वर्ष 2016 में नाभा जेल ब्रेक की घटना के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। अब उनके संभावित राजनीतिक प्रवेश ने पंजाब में इस सवाल को फिर सामने ला दिया है कि क्या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के लिए चुनावी राजनीति का रास्ता आसान होता जा रहा है।

जेल से बाहर आने के बाद सेखों ने सामाजिक गतिविधियों के जरिए अपनी छवि बदलने की कोशिश की है। उनके परिवार के दो सदस्य पहले ही फिरोजपुर जिले में जिला परिषद चुनाव जीत चुके हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर उनके परिवार की राजनीतिक मौजूदगी भी दिखाई देती है।

पंजाब में यह पहला मामला नहीं

पंजाब की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों का चुनावी राजनीति से जुड़ना कोई नई घटना नहीं है। लक्खा सिधाना, जयपाल भुल्लर के परिवार, कुलबीर नरुआना और अमृतपाल सिंह बाठ जैसे नाम अलग-अलग समय पर इसी बहस का हिस्सा रहे हैं।

लक्खा सिधाना ने निर्दलीय चुनाव लड़ा

बठिंडा के पूर्व कबड्डी खिलाड़ी लक्खा सिधाना का नाम अतीत में कई आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा है। बाद में उन्होंने सामाजिक और किसान आंदोलनों से जुड़े चेहरे के रूप में अपनी पहचान बनाई।

उन्होंने 2022 में मौर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर बठिंडा से चुनाव लड़ा।

जयपाल भुल्लर के परिवार ने भी राजनीति का रास्ता चुना

गैंगस्टर जयपाल भुल्लर की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उनके परिवार की राजनीतिक गतिविधियां भी सामने आईं। उनके पिता और पंजाब पुलिस के पूर्व निरीक्षक भूपिंदर सिंह भुल्लर ने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर फिरोजपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।

कुलबीर नरुआना का भी रहा राजनीतिक जुड़ाव

बठिंडा क्षेत्र के कुलबीर नरुआना का नाम भी गंभीर आपराधिक मामलों से जोड़ा जाता रहा। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने स्थानीय युवाओं के बीच प्रभाव बढ़ाया और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। उन्होंने अकाली दल के कुछ धड़ों के साथ मंच भी साझा किया था।

बाद में एक साथी ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

रॉकी फाजिल्का ने भी आजमाई थी किस्मत

पंजाब में आपराधिक पृष्ठभूमि और चुनावी राजनीति के रिश्ते का एक पुराना उदाहरण जसविंदर सिंह उर्फ रॉकी फाजिल्का का भी है।

उन्होंने 2012 में फाजिल्का विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और करीब 39 हजार वोट हासिल किए। वह भाजपा उम्मीदवार सुरजीत कुमार ज्याणी से लगभग 1,600 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए।

इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में वह अकाली दल के नेता शेर सिंह घुबाया के समर्थन में सक्रिय रहे।

अब गुरप्रीत सेखों पर टिकी नजर

गुरप्रीत सेखों की संभावित राजनीतिक एंट्री इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह चुनावी राजनीति में उतरने से पहले परिवार और सामाजिक गतिविधियों के जरिए स्थानीय आधार तैयार करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।

यदि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल होते हैं और चुनाव लड़ते हैं, तो इससे पंजाब में राजनीति और आपराधिक पृष्ठभूमि के बीच संबंध को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो सकती है।

बेबाक24 का नजरिया

चुनाव में किसी व्यक्ति का आपराधिक अतीत अपने आप उसकी राजनीतिक पात्रता तय नहीं करता, लेकिन गंभीर आपराधिक मामलों से जुड़े रहे उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने पर सार्वजनिक जवाबदेही और मतदाताओं के सामने पूरी जानकारी बेहद जरूरी है।

पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनाव केवल दलों की लड़ाई नहीं होंगे; यह भी तय करेंगे कि मतदाता उम्मीदवार के अतीत, छवि और राजनीतिक कार्यक्षमता में किसे ज्यादा महत्व देते हैं।



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