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अखिलेश की ‘चवन्नी’ टिप्पणी पर जयंत चौधरी का पलटवार: बोले- जाट समुदाय को निशाना बनाना अपमानजनक, अहंकार पतन लाता है

by admin@bebak24.com on | 2026-08-22 15:13:08

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अखिलेश की ‘चवन्नी’ टिप्पणी पर जयंत चौधरी का पलटवार: बोले- जाट समुदाय को निशाना बनाना अपमानजनक, अहंकार पतन लाता है

मेरठ | बेबाक24 न्यूज़

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि उन्हें सस्ती राजनीतिक टिप्पणी करनी थी तो कम से कम नाम लेकर बात करते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जाट समुदाय को निशाना बनाना उचित नहीं है और ऐसा अहंकार अंततः राजनीतिक पतन का कारण बनता है।

अखिलेश ने क्या कहा था?

अखिलेश यादव ने हाल ही में एक कार्यक्रम में बिना किसी का नाम लिए कहा था कि गठबंधन के समय कई लोग उनके साथ आए थे। उन्होंने कहा था कि “हमने चवन्नी का रुपया बना दिया था, तब भी हमें छोड़कर चले गए।”

उनकी इस टिप्पणी को राजनीतिक हलकों में जयंत चौधरी से जोड़कर देखा गया। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। बाद में जयंत चौधरी भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ चले गए।

जयंत चौधरी ने क्या दिया जवाब?

जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर अखिलेश यादव का नाम लिए बिना तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास सस्ती राजनीतिक बातें कहने के लिए शब्द हैं तो कम से कम नाम लेकर कहने चाहिए।

उन्होंने जाट समुदाय को लेकर की गई टिप्पणी पर भी आपत्ति जताई और कहा कि उन्होंने इस तरह के अहंकार को करीब से देखा है। उनके अनुसार, ऐसा अहंकार अंततः पतन की ओर ले जाता है।

रालोद ने इसे जाट समाज का अपमान बताया

राष्ट्रीय लोक दल के नेताओं ने अखिलेश यादव की टिप्पणी को केवल जयंत चौधरी तक सीमित न मानते हुए इसे जाट समाज और किसान नेता चौधरी चरण सिंह की विरासत से जोड़ दिया।

उत्तर प्रदेश के मंत्री और रालोद नेता अनिल कुमार ने इसे आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को चौधरी चरण सिंह परिवार के राजनीतिक योगदान को नहीं भूलना चाहिए।

रालोद नेताओं ने संकेत दिया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से उठाया जा सकता है।

2022 में सपा और रालोद साथ थे

वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने गठबंधन किया था। रालोद ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 33 सीटों पर चुनाव लड़ा था और इनमें से 8 सीटें जीतने में सफल रहा था।

इसके मुकाबले वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद को पूरे उत्तर प्रदेश में केवल 1 सीट मिली थी। अखिलेश यादव की टिप्पणी को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से जोड़कर देखा जा रहा है।

अब भाजपा के साथ है रालोद

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जयंत चौधरी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल हो गए। वर्तमान में वह केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

यही राजनीतिक बदलाव अब सपा और रालोद के बीच बढ़ती बयानबाजी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

मायावती भी विवाद में कूदीं

इस विवाद में बसपा प्रमुख मायावती ने भी अखिलेश यादव से माफी की मांग की है।

मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव को केवल रालोद और जयंत चौधरी से ही नहीं, बल्कि चौधरी चरण सिंह के परिवार का कथित अपमान करने के लिए पूरे जाट समुदाय से माफी मांगनी चाहिए।

इससे साफ है कि ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी अब सपा और रालोद के बीच व्यक्तिगत राजनीतिक तकरार से आगे बढ़कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सामाजिक और चुनावी राजनीति का मुद्दा बनती जा रही है।

बेबाक24 का नजरिया

अखिलेश यादव ने अपने बयान में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन राजनीतिक संदर्भ में इसे जयंत चौधरी से जोड़कर देखा गया। जयंत चौधरी और रालोद की प्रतिक्रिया ने विवाद को और तीखा कर दिया है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं का रुख बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। ऐसे में नेताओं की भाषा केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि चुनावी संदेश भी बन सकती है।



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