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दालों की कीमतों पर मंडराया महंगाई का खतरा, आयात और बुवाई में कमी से बढ़ी चिंता; सरकार ने बनाया 30 लाख टन का भंडार

by on | 2026-08-21 15:59:04

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दालों की कीमतों पर मंडराया महंगाई का खतरा, आयात और बुवाई में कमी से बढ़ी चिंता; सरकार ने बनाया 30 लाख टन का भंडार

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

दालों की कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ सकती है। कम आयात, खरीफ सीजन में दालों के रकबे में कमी और मौसम से जुड़ी अनिश्चितता के कारण घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है। खासकर त्योहारी मौसम में मांग बढ़ने के साथ दालों के महंगे होने का खतरा और बढ़ सकता है।

हालांकि, केंद्र सरकार ने संभावित महंगाई से निपटने के लिए करीब 30 लाख टन दालों का भंडार तैयार रखा है। सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इस भंडार से बाजार में दालों की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण रखा जाएगा।

दालों का आयात घटा

2026 के पहले 6 महीनों में भारत का दाल आयात करीब 31.80 लाख टन रहा। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 32.27 लाख टन था। यानी आयात में लगभग 1.46 प्रतिशत की कमी आई है।

इस दौरान अरहर की करीब 5.05 लाख टन मात्रा आयात की गई। अफ्रीकी देशों के साथ म्यांमार भी भारत को दालों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा।

जनवरी से जून के बीच मोजाम्बिक ने 1.83 लाख टन से अधिक अरहर की आपूर्ति की। इसके बाद म्यांमार से करीब 1.23 लाख टन, तंजानिया से करीब 1.01 लाख टन और सूडान से लगभग 49 हजार टन की आपूर्ति हुई।

खरीफ में दालों की बुवाई भी पीछे

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त तक देश में 108.14 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की बुवाई हुई थी। पिछले वर्ष इसी समय यह रकबा 108.49 लाख हेक्टेयर था।

यानी कुल रकबे में करीब 35 हजार हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है।

अरहर की बुवाई इस साल करीब 40.31 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 42.01 लाख हेक्टेयर थी। इसी तरह मूंग का रकबा भी 33.42 लाख हेक्टेयर से घटकर करीब 32.05 लाख हेक्टेयर रह गया।

हालांकि उड़द, कुल्थी और मोठ जैसी कुछ फसलों के रकबे में बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल गिरावट कुछ सीमित हुई है।

असली चिंता पैदावार को लेकर

दालों की बुवाई का कुल आंकड़ा बहुत ज्यादा नहीं गिरा है, लेकिन विशेषज्ञों की चिंता प्रति हेक्टेयर पैदावार को लेकर है।

दलहन की फसल के लिए फसल के बीच के चरण में पर्याप्त वर्षा जरूरी होती है। मौसम में प्रतिकूल बदलाव या वर्षा की कमी होने पर बुवाई का क्षेत्र बहुत ज्यादा घटे बिना भी कुल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

ऐसे में आने वाले हफ्तों में मौसम की स्थिति दालों की उपलब्धता और कीमतों के लिए अहम रहेगी।

त्योहारी मौसम बढ़ा सकता है मांग

व्यापार क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, चना, अरहर और उड़द जैसी दालों की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है।

चना करीब 6,100 रुपये से बढ़कर 6,400 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने की बात कही गई है। उड़द और अरहर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है।

त्योहारी मौसम में घरेलू खपत बढ़ने की संभावना है। ऐसे में अगर उत्पादन और आयात दोनों पर दबाव रहा तो मांग और आपूर्ति के अंतर का असर खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।

सरकार ने तैयार किया 30 लाख टन का भंडार

महंगाई के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने लगभग 30 लाख टन दालों का बफर स्टॉक तैयार रखा है।

इस भंडार में अरहर, उड़द, मूंग, चना और मसूर जैसी प्रमुख दालें शामिल हैं।

सरकार बाजार की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है। यदि किसी दाल के दाम में असामान्य तेजी आती है तो भंडार से नियंत्रित मात्रा में दाल बाजार में उतारकर उपलब्धता बढ़ाने की योजना है।

क्या आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी?

सरकार के पास पर्याप्त भंडार होने से अचानक और तेज कीमत वृद्धि को रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन लंबे समय तक कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए घरेलू उत्पादन और आयात दोनों महत्वपूर्ण रहेंगे।

अगर खरीफ उत्पादन अनुमान से कम रहता है और विदेशी बाजार से आयात भी पर्याप्त नहीं बढ़ता, तो सरकारी भंडार के बावजूद कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

बेबाक24 का नजरिया

दाल भारतीय रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है और इसकी कीमत में मामूली बदलाव भी सीधे घरेलू बजट पर असर डालता है। इस समय चिंता सिर्फ कम बुवाई की नहीं, बल्कि कम आयात और आने वाली पैदावार दोनों की है।

बेबाक24 का मानना है कि 30 लाख टन का सरकारी भंडार तत्काल कीमतों को नियंत्रित करने में सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है, लेकिन स्थायी समाधान किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई और मौसम आधारित जोखिम घटाने तथा आयात नीति को समय पर समायोजित करने में है।

त्योहारी मौसम से पहले सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि बाजार में दाल की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और महंगाई का बोझ उपभोक्ताओं की थाली तक न पहुंचे।



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