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डेटा नहीं, अब रैम है नया ‘तेल’: कीमतों में भारी उछाल से बढ़ी तकनीकी लागत, श्रीधर वेम्बू ने चेताया

by on | 2026-08-21 15:38:20

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डेटा नहीं, अब रैम है नया ‘तेल’: कीमतों में भारी उछाल से बढ़ी तकनीकी लागत, श्रीधर वेम्बू ने चेताया

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

कभी डेटा को नया तेल कहा जाता था, लेकिन कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से विस्तार के बीच कंप्यूटर की रैम अब तकनीकी अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन बनती दिखाई दे रही है। रैम की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर केवल मोबाइल और लैपटॉप तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्वर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाओं और छोटे-बड़े कारोबार की लागत पर भी पड़ रहा है।

जोहो के मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने रैम की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने एक रिपोर्ट साझा करते हुए दावा किया कि पिछले 1 वर्ष में कुछ प्रकार की रैम की कीमतों में 500% तक की वृद्धि हुई है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने बढ़ा दी रैम की मांग

रैम की मांग में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सेवाओं का तेजी से विस्तार माना जा रहा है।

जेमिनी और चैटजीपीटी जैसे बड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्र को चलाने के लिए विशाल कंप्यूटिंग क्षमता और बड़ी मात्रा में तेज मेमोरी की आवश्यकता होती है। इसके चलते दुनिया भर में आंकड़ा केंद्रों और उच्च क्षमता वाले सर्वरों के लिए मेमोरी की मांग बढ़ी है।

यही बढ़ती मांग आपूर्ति पर दबाव डाल रही है और इसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

‘रैम नया तेल’ क्यों कही जा रही है?

रैम कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अस्थायी रूप से उन सूचनाओं को सुरक्षित रखती है, जिन पर उपकरण तत्काल काम कर रहा होता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बड़े तंत्र एक साथ बहुत बड़ी मात्रा में सूचनाओं पर काम करते हैं। इसलिए पारंपरिक कंप्यूटरों की तुलना में उन्हें अधिक और तेज रैम की जरूरत पड़ती है।

यही वजह है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के साथ रैम की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। श्रीधर वेम्बू ने इसी बदलती स्थिति को ‘रैम नया तेल’ कहकर रेखांकित किया है।

असर सिर्फ बड़ी तकनीकी कंपनियों पर नहीं

महंगी रैम का असर केवल बड़ी तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। सर्वर, निजी कंप्यूटर, लैपटॉप और दूसरे उपकरणों की लागत बढ़ने पर उसका असर उन कारोबारों पर भी पड़ सकता है जो अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए तकनीक पर निर्भर हैं।

अस्पताल, चिकित्सालय, बैंक, कार्यालय, छोटे कारोबारी और यहां तक कि व्यक्तिगत पेशेवर भी कंप्यूटर और सर्वर जैसी तकनीकी व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उपकरणों की लागत बढ़ने पर सेवाओं की लागत पर भी दबाव पड़ सकता है।

महंगे उपकरणों का असर आम उपभोक्ता पर

मेमोरी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर नए कंप्यूटर और लैपटॉप की कीमतों पर भी पड़ सकता है। उदाहरण के तौर पर, कुछ महंगे लैपटॉप मॉडलों की कीमतों में हाल के महीनों में काफी वृद्धि का दावा किया गया है।

हालांकि किसी एक उत्पाद की कीमत में बदलाव के लिए केवल रैम की बढ़ती कीमत को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। विनिमय दर, प्रोसेसर, भंडारण, आपूर्ति श्रृंखला और कंपनी की मूल्य निर्धारण नीति भी कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

संकट लंबे समय तक रहने की आशंका

मेमोरी उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए बढ़ती मांग के कारण मेमोरी बाजार पर दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है।

कुछ प्रमुख मेमोरी निर्माता कंपनियों ने भी आने वाले वर्षों में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन को लेकर चुनौती जताई है। ऐसे में मौजूदा मेमोरी संकट केवल अस्थायी मूल्य वृद्धि है या लंबे समय तक रहने वाला बदलाव, यह आने वाले वर्षों में स्पष्ट होगा।

भारत के लिए भी बड़ी चुनौती

श्रीधर वेम्बू ने भारत के लिए भी रणनीतिक तैयारी की जरूरत पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि जिस तरह भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक रणनीति विकसित की है, उसी तरह महत्वपूर्ण तकनीकी संसाधनों के लिए भी मजबूत नीति की आवश्यकता होगी।

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ा केंद्र और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में मेमोरी चिप और उससे जुड़े घटकों की पर्याप्त और भरोसेमंद आपूर्ति भविष्य में महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक मुद्दा बन सकती है।

बेबाक24 का नजरिया

रैम की कीमतों में बढ़ोतरी केवल कंप्यूटर के पुर्जे महंगे होने की खबर नहीं है। यह दिखाता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की होड़ ने तकनीकी संसाधनों की मांग कितनी तेजी से बढ़ा दी है।

बेबाक24 का मानना है कि भारत को केवल कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोगों का उपभोक्ता बनने के बजाय मेमोरी चिप, अर्धचालक और सर्वर जैसे बुनियादी ढांचे में भी आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी। आने वाले समय में जिसके पास कंप्यूटिंग क्षमता और मेमोरी की मजबूत आपूर्ति होगी, उसकी डिजिटल अर्थव्यवस्था उतनी ही मजबूत होगी।



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