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भारत-जापान रक्षा संबंधों को नई धार: राजनाथ सिंह-शिंजिरो कोइजुमी की अहम वार्ता, हिंद-प्रशांत पर बढ़ेगा सहयोग

by admin@bebak24.com on | 2026-08-20 16:12:19

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भारत-जापान रक्षा संबंधों को नई धार: राजनाथ सिंह-शिंजिरो कोइजुमी की अहम वार्ता, हिंद-प्रशांत पर बढ़ेगा सहयोग

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत और जापान ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते रणनीतिक हालात के बीच अपने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच हुई अहम द्विपक्षीय वार्ता में समुद्री सुरक्षा, रक्षा उपकरण, सैन्य तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता, समृद्धि और स्वतंत्र नौवहन को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच हुई बैठक

भारत-जापान की यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य और सामरिक गतिविधियों को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है।

राजनाथ सिंह ने बैठक की शुरुआत में कहा कि भारत और जापान साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी सम्मान और लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत संबंधों पर आधारित मजबूत साझेदारी साझा करते हैं।

उन्होंने कहा कि एशिया के 2 प्रमुख लोकतंत्रों की यह जिम्मेदारी है कि वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

‘समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता जरूरी’

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और जापान की समुद्री जीवनरेखाओं के सामने चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में नौवहन की स्वतंत्रता, हवाई क्षेत्र में निर्बाध आवाजाही और वैध व्यापार की सुरक्षा केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता भी है।

उन्होंने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताया।

राजनाथ ने भारत के ‘महासागर’ दृष्टिकोण और जापान की ‘मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत’ पहल के बीच बेहतर तालमेल को महत्वपूर्ण बताया।

रक्षा तकनीक और ‘मेक इन इंडिया’ पर भी चर्चा

बैठक में दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया।

भारत की ओर से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत रक्षा उत्पादन, तकनीकी साझेदारी और औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इससे दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग के अवसर बढ़ सकते हैं।

भारत और जापान पिछले कुछ वर्षों में रक्षा संबंधों को केवल सैन्य अभ्यासों तक सीमित रखने के बजाय रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी तक विस्तार देने पर लगातार जोर दे रहे हैं।

अगले वर्ष 75 साल पूरे होंगे राजनयिक रिश्तों के

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और जापान अगले वर्ष राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे करेंगे।

इस महत्वपूर्ण पड़ाव से पहले दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की कोशिशों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

पिछले वर्षों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय रक्षा संवाद, सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ा है।

कोइजुमी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दी श्रद्धांजलि

द्विपक्षीय बैठक से पहले जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और पुष्पांजलि अर्पित की।

उनकी यह यात्रा भारत के सैनिकों के बलिदान के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी गई।

भारत-जापान साझेदारी का अगला चरण

रक्षा सहयोग में बढ़ती निकटता भारत और जापान के व्यापक रणनीतिक संबंधों का हिस्सा है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक संपर्क को महत्वपूर्ण मानते हैं।

रक्षा उपकरणों के सह-निर्माण, तकनीकी हस्तांतरण और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्र में आगे बढ़ने से दोनों देशों की साझेदारी को आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर मजबूती मिल सकती है।

बेबाक24 का नजरिया

भारत-जापान की यह रक्षा वार्ता केवल 2 देशों के बीच सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है। हिंद-प्रशांत में बदलते शक्ति संतुलन के बीच समुद्री सुरक्षा, स्वतंत्र नौवहन और रक्षा तकनीक आने वाले वर्षों में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख आधार बन सकते हैं।

बेबाक24 का मानना है कि भारत को जापान के साथ सहयोग को रक्षा खरीद से आगे बढ़ाकर संयुक्त निर्माण, स्वदेशी तकनीक और दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी तक ले जाना चाहिए। इससे भारत की रणनीतिक क्षमता मजबूत होगी और हिंद-प्रशांत में उसकी भूमिका भी और प्रभावशाली बनेगी।



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