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'पीएम के सामने इतना मत झुकिए'; सोशल मीडिया अकाउंट बैन होने पर भड़के अरविंद केजरीवाल, मेटा से माँगा जवाब

by admin@bebak24.com on | 2026-08-06 19:38:57

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'पीएम के सामने इतना मत झुकिए'; सोशल मीडिया अकाउंट बैन होने पर भड़के अरविंद केजरीवाल, मेटा से माँगा जवाब

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को दावा किया कि भारत में उनके आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस कार्रवाई को लेकर केजरीवाल ने टेक कंपनी मेटा पर तीखा हमला बोलते हुए अकाउंट ब्लॉक किए जाने की वजह स्पष्ट करने की मांग की है।

अरविंद केजरीवाल के मुख्य आरोप और बयान

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए मेटा की कार्यप्रणाली और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए:

  • भारत में अकाउंट एक्सेस बंद: केजरीवाल ने कहा कि मेटा के भारत कार्यालय से मौखिक जानकारी लेने पर पता चला कि उनका अकाउंट भारत में लिमिट कर दिया गया है और इसे देश के भीतर से एक्सेस नहीं किया जा सकता।

  • कोई स्पष्ट कारण नहीं: उन्होंने दावा किया कि कंपनी के अधिकारियों ने न तो अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने का कोई कानूनी कारण बताया और न ही यह स्पष्ट किया कि इस पाबंदी को कैसे हटाया जा सकता है।

  • केंद्र सरकार पर तंज: मेटा को आड़े हाथों लेते हुए केजरीवाल ने लिखा, "आपने मेरे अकाउंट पर रोक क्यों लगा दी है? हमारे प्रधानमंत्री के सामने इतना मत झुकिए, वरना वह आपको भारत में सिर्फ़ अपना ही अकाउंट चलाने की अनुमति देंगे।"

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और राजनीतिक बयानबाजी

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में मेटा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो हटाए जाने पर संसदीय समिति के कड़े रुख के बाद कंपनी ने माफी मांगी थी:

  • विपक्ष का आरोप: आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव और राजनीतिक बहसों के बीच डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सरकार के दबाव में विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाया जा रहा है।

  • आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार: केजरीवाल के इन गंभीर दावों पर फिलहाल मेटा या इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

बेबाक24 टेक

भारत में नेताओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर तकनीकी पाबंदियां या जियो-ब्लॉकिंग का यह मुद्दा अभिव्यक्ति की आजादी और निष्पक्ष डिजिटल मंचों की उपलब्धता पर नए सवाल खड़े करता है। यदि किसी शीर्ष विपक्षी नेता का अकाउंट बिना स्पष्ट कानूनी नोटिस के सीमित किया जाता है, तो यह आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।



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