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बाबा कालभैरव के दरबार में सजा दिव्य हिम श्रृंगार, बर्फ और फूलों से अलौकिक बनी काशी

by on | 2026-08-06 21:05:00

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बाबा कालभैरव के दरबार में सजा दिव्य हिम श्रृंगार, बर्फ और फूलों से अलौकिक बनी काशी

वाराणसी । सावन मास के पावन अवसर पर काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का पारंपरिक एवं भव्य हिम श्रृंगार महोत्सव गुरुवार को श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। बाबा के दिव्य हिम श्रृंगार और मनमोहक झांकी के दर्शन के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।


पूरा मंदिर रंग-बिरंगे पुष्पों, मालाओं, हरी पत्तियों और बर्फ की सिल्लियों से भव्य रूप से सजाया गया, जिससे मंदिर का वातावरण भक्तिमय और अलौकिक दिखाई दिया।


वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ पंचामृत स्नान


महोत्सव के दौरान संयोजक पवन कुमार उपाध्याय के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा का पंचामृत स्नान कराया गया। इसके बाद सिंदूर अर्पित कर नवीन वस्त्र एवं विशेष मुखौटा धारण कराया गया। सुगंधित पुष्पों, आभूषणों और धार्मिक सामग्रियों से बाबा का भव्य हिम श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।


बर्फानी बाबा की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र


मंदिर परिसर में हिमालय स्थित अमरनाथ धाम की तर्ज पर बर्फ की सिल्लियों से बर्फानी बाबा की आकर्षक प्रतिकृति तैयार की गई। साथ ही बाबा कालभैरव की रजत प्रतिमा की भव्य झांकी भी सजाई गई। श्रद्धालुओं ने निर्धारित दूरी से जलाभिषेक कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।


फूलों और हिमखंडों से सजा मंदिर परिसर


गुलाब, गेंदा, बेला सहित विभिन्न सुगंधित फूलों, रंग-बिरंगे हिमखंडों, कृत्रिम हिम सरोवर, हरी पत्तियों और फलों से मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने इस अद्भुत दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।


20 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा


मंदिर के पुजारियों के अनुसार, बाबा कालभैरव का विशेष हिम श्रृंगार केवल सावन मास में किया जाता है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से अत्यधिक वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। यह परंपरा पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है।


श्रृंगार महोत्सव के बाद मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु देर शाम तक भक्ति रस में सराबोर रहे।





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