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MLC चुनाव ब्रेकिंग: वाराणसी खंड में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार, माध्यमिक शिक्षक संघ ने घोषित किए प्रत्याशी

by on | 2026-07-22 00:34:33

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MLC चुनाव ब्रेकिंग: वाराणसी खंड में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार, माध्यमिक शिक्षक संघ ने घोषित किए प्रत्याशी

​लखनऊ/वाराणसी। विधान परिषद के द्विवार्षिक निर्वाचन को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (बोर्ड) की बैठक एमएलसी एवं संरक्षक राजबहादुर सिंह चंदेल की अध्यक्षता में लखनऊ में संपन्न हुई, जिसमें विभिन्न शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया गया।

​संघ द्वारा घोषित प्रत्याशियों की सूची:

​वाराणसी खंड शिक्षक क्षेत्र: चेतनारायण सिंह (पूर्व एमएलसी)

​बरेली-मुरादाबाद खंड: विमिलेंद्र कुमार शर्मा

​आगरा-अलीगढ़ क्षेत्र: जगदीप सिंह नौहवार

​गोरखपुर-फैजाबाद क्षेत्र: डॉ. राकेश सिंह

​लखनऊ शिक्षक क्षेत्र: वीरेंद्र सिंह

​मेरठ-सहानुपुर क्षेत्र: स्वराज पाल दुहुड़

​वाराणसी खंड में उलझा समीकरण: इंग्लिश मीडियम के 'रसायन शिक्षक' बिगाड़ रहे सियासी गणित!

​वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और घमासान से भरा होने वाला है। एक तरफ जहां पारंपरिक राजनीति के दिग्गज मैदान में हैं, वहीं दूसरी ओर इंग्लिश मीडियम (CBSE/ICSE) के शिक्षकों की नई एंट्री ने स्थापित नेताओं के पसीने छुड़ा दिए हैं।

​सनबीम भगवानपुर के रसायन विज्ञान (Chemistry) विभाग के शिक्षक अरुण कुमार पांडेय अपने सियासी और सामाजिक 'फार्मूले' से चुनाव का पूरा समीकरण घोलते नजर आ रहे हैं। इस बार पहली बार लगभग 7,000 इंग्लिश मीडियम शिक्षक मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, जिन्हें साधने के लिए अरुण पांडेय ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है।

​प्राइवेट व वित्त-विहीन शिक्षकों की पीड़ा: 'शिक्षा की रीढ़, पर सम्मान से वंचित'

​चुनाव मैदान में उतरे अरुण पांडेय ने सीबीएसई, आईसीएससी और वित्त-विहीन स्कूलों के शिक्षकों की गंभीर समस्याओं को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है:

​आर्थिक असुरक्षा: 8,000 से 80,000 रुपये के बीच वेतन की भारी असमानता, 8-9 घंटे की ड्यूटी के बाद भी इंक्रीमेंट का न होना और महीनों सैलरी रुकना।

​नौकरी की अनिश्चितता: 11 महीने का कॉन्ट्रैक्ट देकर हटा देना, CL/EL/ML जैसी छुट्टियों पर कटौती और EPF, Gratuity व ESI जैसी सामाजिक सुरक्षा का अभाव।

​अतिरिक्त बोझ व शोषण: पढ़ाई के अलावा एडमिशन, मार्केटिंग और फीस वसूली जैसे गैर-शैक्षणिक कामों का दबाव।

​सम्मान की कमी: उच्च योग्यता (B.Ed, M.A, TET, CTET) होने के बावजूद आत्मसम्मान पर चोट।

​क्या है अरुण पांडेय का विज़न और समाधान?

​शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन की सुरक्षा को प्राथमिक उद्देश्य बताते हुए उन्होंने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

​न्यूनतम वेतनमान व स्थायी नीति: प्राइवेट व वित्त-विहीन शिक्षकों के लिए न्यूनतम वेतन तय हो तथा 3 साल की सेवा के बाद स्थायी करने का नियम बने। EPF, Gratuity और ESI अनिवार्य किया जाए।

​कैशलेस इलाज व बीमा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैशलेस इलाज योजना का लाभ वित्त-विहीन, सीबीएसई और आईसीएससी के सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को भी मिले।

​गैर-शैक्षणिक कार्य पर रोक: शिक्षकों से मार्केटिंग और फीस वसूली का काम पूरी तरह बंद हो।

​प्रबंधन को सहयोग राशि: किसी वर्ष घाटे की स्थिति में विद्यालय प्रबंधन को सरकार द्वारा आर्थिक सहयोग दिया जाए ताकि संस्थान व रोजगार सुरक्षित रहें।

​"शिक्षा वाउचर योजना": सरकारी खर्च में गरीब को प्राइवेट शिक्षा का मॉडल

​अरुण पांडेय ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 'शिक्षा वाउचर योजना' का प्रस्ताव रखा है:

​मूल विचार: "सरकार खर्च उठाए, बच्चा प्राइवेट में पढ़े।"

​कैसे काम करेगी योजना? सरकार RTE के तहत 25% गरीब बच्चों को 'शिक्षा वाउचर' दे, जिससे वे किसी भी मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल में पढ़ सकें। पैसा सीधे स्कूल को ट्रांसफर होगा।

​मुख्य लाभ:

​गरीब बच्चों को: BHU और KVS स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुफ्त मिलेगी।

​शिक्षकों को: स्कूल की सीटें भरने से आय बढ़ेगी, समय पर वेतन और सम्मान मिलेगा।

​प्रबंधन को: खाली सीटों की भरपाई होगी और स्कूल बंद होने से बचेंगे।

​सरकार को: नए इंफ्रास्ट्रक्चर पर हजारों करोड़ खर्च करने के बजाय मौजूदा व्यवस्था का बेहतर इस्तेमाल होगा।

​वाराणसी खंड में नए फैक्टर्स और विभिन्न गुटों के प्रत्याशियों की एंट्री से चुनावी घमासान अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है।



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