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स्वामित्व योजना में गुजरात अव्वल: देश के 50% से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड अकेले राज्य में बने

by on | 2026-06-14 23:29:42

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स्वामित्व योजना में गुजरात अव्वल: देश के 50% से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड अकेले राज्य में बने

गांधीनगर | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर ग्रामीण सशक्तिकरण के मोर्चे से एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना' के दूसरे चरण में गुजरात ने देश भर में पहला स्थान हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने इस योजना के तहत देश में सबसे अधिक 18.50 लाख से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड जारी किए हैं। राज्य की यह कामयाबी इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इस चरण में पूरे देश में बने कुल कार्ड्स में से 50 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी अकेले गुजरात की है।


गुजरात की रिकॉर्ड तोड़ सफलता: आंकड़ों की जुबानी

योजना के दूसरे चरण (2021-22) में राष्ट्रीय स्तर और गुजरात के प्रदर्शन की तुलनात्मक स्थिति इस प्रकार है:

विवरणराष्ट्रीय स्तर (कुल)अकेले गुजरात का योगदान
ड्रोन उड़ान (गांव)58,197 गांव14,900 गांव
प्रमाणित गांव-11,511 गांव
जारी प्रॉपर्टी कार्ड32,35,260 कार्ड18,50,614 कार्ड (57%)

मेहसाणा और अहमदाबाद जिले सबसे आगे

गुजरात पंचायती राज और राजस्व विभाग के तालमेल से चलाए गए इस अभियान में जिला स्तर पर भी शानदार काम हुआ है:

  • मेहसाणा: 1,66,504 प्रॉपर्टी कार्ड जारी कर राज्य में नंबर-1 रहा।

  • अहमदाबाद: 1,53,125 कार्ड के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

  • अन्य जिले: खेड़ा, बनासकांठा और आणंद जिलों में भी एक-एक लाख से अधिक कार्ड वितरित किए जा चुके हैं।

ड्रोन मैपिंग से खत्म हुए विवाद, मिला मालिकाना हक

दशकों से भारतीय गांवों में आवासीय संपत्तियों (आबादी भूमि) के सटीक और वैधानिक कागजात न होने के कारण ग्रामीणों को अपने ही घरों पर मालिकाना हक साबित करने में दिक्कत होती थी।

इस योजना के तहत भारतीय सर्वेक्षण विभाग की मदद से अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक और GIS (Geographic Information System) आधारित डिजिटल मैपिंग का उपयोग किया गया। पारदर्शी सत्यापन के बाद कार्ड जारी होने से गांवों में पीढ़ियों से चले आ रहे आपसी भूमि विवाद और अदालती मुकदमे पूरी तरह खत्म हो रहे हैं।

आर्थिक मोर्चे पर गेमचेंजर: कार्ड पर ₹50 लाख तक का बैंक लोन

स्वामित्व योजना ने ग्रामीण संपत्तियों को एक मूल्यवान वित्तीय परिसंपत्ति  में बदल दिया है:

  • ऋण की सुविधा: प्रॉपर्टी कार्ड को कानूनी मान्यता मिलने के बाद अब ग्रामीण इसके आधार पर बैंकों से आसानी से लोन ले पा रहे हैं।

  • बड़ी वित्तीय मदद: गुजरात में इन प्रॉपर्टी कार्ड्स पर ग्रामीणों को ₹50 लाख तक के बैंक लोन स्वीकृत किए गए हैं।

  • आर्थिक आत्मनिर्भरता: इस वित्तीय समावेशन  ने गांवों में छोटे उद्योगों, व्यवसाय, शिक्षा और आजीविका के नए द्वार खोले हैं, जिससे विशेषकर ग्रामीण महिलाओं और वंचित वर्गों को आर्थिक सुरक्षा मिली है।

Bebak24 टेक

प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को डिजिटल और कानूनी रूप से मजबूत करने वाला एक क्रांतिकारी कदम है। गुजरात सरकार द्वारा ड्रोन उड़ानों और पारदर्शी सत्यापन के जरिए देश के आधे से अधिक कार्ड अकेले अपने राज्य में बना लेना यह साबित करता है कि वहां का प्रशासनिक ढांचा तकनीकों को अपनाने में कितना आगे है।

सबसे महत्वपूर्ण पहलू इस कार्ड का वित्तीय मूल्य है। ग्रामीण भारत में अब तक लोन लेने के लिए खेती की जमीन (कृषि भूमि) को ही आधार माना जाता था, जिससे भूमिहीन या सिर्फ मकान के मालिक वित्तीय मदद से वंचित रह जाते थे। अब आबादी घर के कागजात पर ₹50 लाख तक का लोन मिलना गांवों में रिवर्स माइग्रेशन (शहरों से गांवों की ओर लौटना) और ग्रामीण स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा। यह मॉडल आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ बन सकता है।



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