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महाराष्ट्र में सियासी हलचल: उद्धव की आपात बैठक, राउत की चेतावनी

by on | 2026-06-14 23:35:39

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महाराष्ट्र में सियासी हलचल: उद्धव की आपात बैठक, राउत की चेतावनी

मुंबई | पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे ऐतिहासिक घमासान और सांसदों के सामूहिक दलबदल के बीच अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। शिव सेना (यूबीटी) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार (14 जून) को मुंबई स्थित अपने आवास 'मातोश्री' पर पार्टी सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई।

इस बैठक को विरोधियों की ओर से पार्टी में संभावित टूट की कोशिशों को नाकाम करने और अपने संसदीय दल को एकजुट रखने के 'मातोश्री' के बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

'मातोश्री' में नौ सांसदों की हाजिरी: फिजिकल और डिजिटल महामंथन

बैठक में उद्धव ठाकरे ने अपने सभी नौ लोकसभा सांसदों की एकजुटता का प्रदर्शन किया:

  • प्रत्यक्ष उपस्थिति: सांसद अनिल देसाई, संजय राउत और राजाभाऊ पराग प्रकाश वाजे व्यक्तिगत रूप से मातोश्री पहुंचे।

  • वर्चुअल उपस्थिति: यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख और हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल आष्टेकर समेत पांच अन्य सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस आपातकालीन चर्चा में शामिल हुए।

  • उद्देश्य: बैठक का मुख्य एजेंडा राष्ट्रीय स्तर पर बदल रहे सियासी घटनाक्रमों के बीच महाराष्ट्र में किसी भी 'ऑपरेशन लोटस' या बगावत की आशंका को समय रहते पूरी तरह कुचलना था।

दलबदल की अटकलों पर संजय राउत का तीखा हमला— 'शुरू होगा ऑपरेशन भेड़िया'

बैठक खत्म होने के बाद शिव सेना (यूबीटी) के नेताओं ने मीडिया में चल रही बगावत की खबरों पर बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया। राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा:

"हमें डराने और हमारी पार्टी को तोड़ने की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी। आप किस 'ऑपरेशन टाइगर' या 'ऑपरेशन लोटस' की बात कर रहे हैं? हम सब शेर हैं और शेर ही रहेंगे। अब हम विरोधियों के खिलाफ 'ऑपरेशन भेड़िया' शुरू करने जा रहे हैं। हमारा संसदीय दल पूरी तरह चट्टान की तरह मजबूत और एकजुट है।"

वहीं, वरिष्ठ नेता अनिल देसाई ने इस बैठक को एक सामान्य और नियमित प्रक्रिया बताते हुए कहा कि मीडिया में चल रही दलबदल की सभी खबरें पूरी तरह बेबुनियाद और अफवाह मात्र हैं।

अतीत का साया और 'दलबदल कानून' का कानूनी पेंच

उद्धव ठाकरे कैंप की यह अभूतपूर्व सतर्कता अकारण नहीं है। इसके पीछे दो बड़े कारण काम कर रहे हैं:

  1. साल 2022 का कड़वा अनुभव: जून 2022 में इसी तरह की सुगबुगाहट के बीच एकनाथ शिंदे ने विधायकों के एक बड़े धड़े के साथ बगावत कर दी थी, जिससे महाविकास अघाड़ी (MVA) की सरकार गिर गई थी। उसके बाद 2024 के विधानसभा चुनावों में भी एनडीए (महायुति) ने महाराष्ट्र की सत्ता पर दोबारा कब्जा कर लिया। उद्धव ठाकरे अब उस इतिहास को दोबारा दोहराने का मौका नहीं देना चाहते।

  2. सिंघवी की कानूनी चेतावनी: टीएमसी और शिवसेना के भीतर चल रही इस उठापटक के बीच जाने-माने कानूनविद् और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी बागियों को चेताया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसलों का हवाला देते हुए कहा, "विधायक या संसदीय दल में केवल दो-तिहाई (2/3) का बहुमत जुटा लेना 'दलबदल विरोधी कानून' (Anti-Defection Law) के तहत अयोग्यता से बचने की पूरी गारंटी नहीं है। पाला बदलने वाले ऐसे लोग अयोग्य ठहराए जाने के हकदार हैं।"

Bebak24 टेक

दिल्ली में टीएमसी के 20 सांसदों द्वारा बगावत कर त्रिपुरा की एनसीपी में विलय करने की खबर ने देश के सभी क्षेत्रीय दलों को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। उद्धव ठाकरे द्वारा अपने महज 9 सांसदों को आनन-फानन में 'मातोश्री' बुलाना या ऑनलाइन जोड़ना यह साफ दिखाता है कि पार्टी के भीतर कहीं न कहीं असुरक्षा का भाव जरूर है।

2022 में एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के झटकों को झेल चुकी विपक्षी राजनीति अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। संजय राउत का 'ऑपरेशन भेड़िया' वाला बयान भले ही आक्रामक लगे, लेकिन असल चुनौती कानूनी और संख्याबल के मोर्चे पर अपने कुनबे को बिखरने से बचाने की है। महाराष्ट्र में महायुति सरकार के मजबूत होने के बाद, विपक्षी सांसदों पर पाला बदलने का दबाव हमेशा बना रहता है, और 'मातोश्री' की यह आपात बैठक उसी दबाव को नियंत्रित करने की एक रक्षात्मक राजनीतिक कूटनीति है।



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