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वेस्टर्न यूपी से पूर्वांचल तक चक्रव्यूह भेदने की तैयारी: TCS की नौकरी छोड़ राजनीति में उतरे ऐश्वर्य राज सिंह बने RLD के नए यूपी कप्तान!

by on | 2026-08-08 20:55:24

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वेस्टर्न यूपी से पूर्वांचल तक चक्रव्यूह भेदने की तैयारी: TCS की नौकरी छोड़ राजनीति में उतरे ऐश्वर्य राज सिंह बने RLD के नए यूपी कप्तान!

वाराणसी/लखनऊ:

उत्तर प्रदेश में 2027 के सियासी संग्राम से पहले राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने अपने रणनीतिक बिसात पर सबसे बड़ा मोहरा चल दिया है। रामाशीष राय के अचानक इस्तीफे और पार्टी छोड़ने के कुछ ही घंटों के भीतर आरएलडी मुखिया जयंत चौधरी ने संगठन की कमान युवा और टेक-सेवी नेता ऐश्वर्य राज सिंह के हाथों में सौंप दी है।

​इसे महज एक आम बदलाव मानना भूल होगी—यह पश्चिमी यूपी के जाट बेल्ट से निकलकर पूर्वांचल के गढ़ में सेंध लगाने और सूबे के युवाओं को साधने की सोची-समझी घेराबंदी है।

​ राजघराने का रुतबा, कॉर्पोरेट का तजुर्बा

​ऐश्वर्य राज सिंह का प्रोफाइल परंपरागत राजनेताओं से पूरी तरह अलग है। बस्ती के प्रतिष्ठित राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले ऐश्वर्य ने कभी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) जैसी दिग्गजों में कॉर्पोरेट की नौकरी की है। आईटी सेक्टर का मैदान छोड़कर जब वह राजनीति में उतरे, तो उन्होंने RLD की डिजिटल और आईटी टीम की नींव मजबूत की। 'टीम आरएलडी' के जरिए युवाओं को जोड़ने में उनकी अहम भूमिका रही है। हालांकि, 2017 में बस्ती विधानसभा सीट से उन्हें चुनावी शिकस्त मिली थी, लेकिन संगठन के भीतर उनका कद लगातार बढ़ता गया।

​ 'वेस्ट' से 'ईस्ट' की ओर आरएलडी का रुख

​अब तक रालोद को मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पार्टी माना जाता रहा है। लेकिन बस्ती (पूर्वांचल) से ताल्लुक रखने वाले ऐश्वर्य राज सिंह को प्रदेश की कमान देकर जयंत चौधरी ने साफ संकेत दे दिया है कि 2027 में पार्टी सिर्फ जाट और किसान बेल्ट तक सीमित नहीं रहेगी। पूर्वांचल के क्षत्रपों के बीच एक शिक्षित, युवा और राजशाही पृष्ठभूमि वाले चेहरे को आगे कर आरएलडी पूर्वी यूपी में अपनी जड़ें गहरी करना चाहती है।

​ रामाशीष राय का जाना और जयंत की त्वरित 'सर्जिकल स्ट्राइक'

​रामाशीष राय के पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देते ही राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई थीं। लेकिन जयंत चौधरी ने बिना एक पल गंवाए नए अध्यक्ष का नाम घोषित कर यह जता दिया कि संगठन में किसी के आने-जाने से काम नहीं रुकता। रामाशीष के जाने से पैदा हुए खालीपन को भरने और कार्यकर्ताओं में यह संदेश देने के लिए कि नेतृत्व पूरी तरह सतर्क है, ऐश्वर्य की ताजपोशी एक क्विक रिस्पांस की तरह देखी जा रही है।

​NDA गठबंधन में ताकत दिखाने की चुनौती

​2022 में समाजवादी पार्टी का हाथ थामने वाली आरएलडी अब भारतीय जनता पार्टी के साथ एनडीए (NDA) के कुनबे में शामिल है। 2027 के चुनाव में बीजेपी के साथ सीट शेयरिंग की टेबल पर मजबूत मोलभाव करने के लिए RLD को अपना बूथ मैनेजमेंट और जनाधार साबित करना होगा। ऐश्वर्य राज सिंह के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बिखरे हुए कार्यकर्ताओं को एकजुट करना, डिजिटल वॉरफेयर के दौर में युवाओं को पार्टी से जोड़ना और पार्टी को सिर्फ 'किसान आंदोलन' के ठप्पे से निकालकर ऑल-यूपी प्लेयर बनाना है।

बेबाक 24 नजरिया:

ऐश्वर्य राज सिंह की नियुक्ति आरएलडी का एक बड़ा जुआ है। क्या कॉर्पोरेट का मैनेजमेंट और सोशल मीडिया का आभामंडल उत्तर प्रदेश की जमीनी और जटिल जातीय राजनीति में वोटों की फसल काट पाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन इतना तय है कि जयंत चौधरी ने पूर्वांचल और युवा कार्ड खेलकर 2027 की बिसात पर पहला बड़ा दांव चल दिया है।



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