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सीजेपी प्रोटेस्ट वायरल रील मामला— माफ़ी और पीएम मोदी की अपील के बाद भी धमकियां जारी

by admin@bebak24.com on | 2026-08-05 16:41:38

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सीजेपी प्रोटेस्ट वायरल रील मामला— माफ़ी और पीएम मोदी की अपील के बाद भी धमकियां जारी

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में समाप्त हुए कॉकरोच जनता पार्टी के 36 दिवसीय छात्र आंदोलन में शामिल हुई एक 15 वर्षीया छात्रा और उसका परिवार गंभीर सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। वायरल रील में आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग के बाद मांगी गई सार्वजनिक माफ़ी और प्रधानमंत्री द्वारा क्षमा किए जाने के बावजूद, छात्रा को लगातार दुष्कर्म, तेज़ाब फेंकने और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। डर के कारण परिवार 26 जुलाई से अपना घर छोड़कर अज्ञात स्थान पर रहने को मजबूर है।

घटनाक्रम और ज़ीरो एफ़आईआर की वापसी

  • वायरल रील और माफ़ी: 22 जुलाई को आंदोलन में शामिल हुई 10वीं की छात्रा (श्रुति) ने भीड़ से प्रभावित होकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। रील वायरल होने के बाद छात्रा ने 1 अगस्त को वीडियो जारी कर बिना शर्त देश से माफ़ी मांगी।

  • क़ानूनी कार्रवाई: जनता दल लोकतांत्रिक पार्टी से जुड़ीं वकील स्मृति सिंह चंदेल की शिकायत पर नोएडा पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 352, 353(1) और 356(1) के तहत ज़ीरो एफ़आईआर दर्ज की थी।

  • शिकायत वापस: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश के बाद जिसमें उन्होंने बच्चों को "गुमराह" बताते हुए माफ़ करने की बात कही थी, शिकायतकर्ता ने अपनी पुलिस शिकायत पूरी तरह वापस ले ली।

साइबर बुलिंग, धमकियां और मानसिक तनाव

माफ़ी और क़ानूनी कार्रवाई समाप्त होने के बावजूद ऑनलाइन उत्पीड़न जारी है:

  • गंभीर धमकियां: छात्रा का व्यक्तिगत फोन नंबर लीक होने के बाद से उसे लगातार अश्लील मैसेज, रेप और तेज़ाब हमले की धमकियां मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के चलते परिजनों व रिश्तेदारों ने भी दूरी बना ली है।

  • मानसिक स्थिति: 15 वर्षीय छात्रा ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण वह दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुकी है, लेकिन अब वह हिम्मत रखकर अपनी बोर्ड परीक्षाओं पर ध्यान देना चाहती है।

  • सुरक्षा पर सवाल: छात्रा की मां ने सवाल उठाया, "जब प्रधानमंत्री ने माफ़ कर दिया है, तो धमकियां देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? हम अपना घर छोड़कर छिपकर रहने को मजबूर हैं।"

बेबाक24 टेक

यह मामला दर्शाता है कि सोशल मीडिया ट्रॉलिंग और डिजिटल मॉब लिंचिंग किस प्रकार किसी नाबालिग के जीवन और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। विरोध प्रदर्शनों में भाषाई मर्यादा का ध्यान रखना जितना आवश्यक है, उतना ही यह भी ज़रूरी है कि माफ़ी मांग चुके किसी नाबालिग को कानून अपने हाथ में लेकर निशाना बनाने वाले ट्रोल्स पर कठोर पुलिस कार्रवाई की जाए।



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