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आर्टिकल 370 के 7 साल— "हम न भूले हैं, न समझौता किया है"; सीएम उमर अब्दुल्लाह का तीखा हमला

by admin@bebak24.com on | 2026-08-05 17:18:17

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आर्टिकल 370 के 7 साल— "हम न भूले हैं, न समझौता किया है"; सीएम उमर अब्दुल्लाह का तीखा हमला

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने के सात साल पूरे होने के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने केंद्र सरकार के 2019 के फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर की विशेष पहचान और अधिकारों की बहाली के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के मुख्य बिंदु

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने 5 अगस्त 2019 के घटनाक्रम को याद करते हुए प्रदेशवासियों की भावनाओं को रेखांकित किया:

  • "न भूले हैं, न स्वीकार किया है": उमर अब्दुल्लाह ने लिखा, "7 साल बीत गए हैं, लेकिन हम न तो भूले हैं और न ही हमने मौजूदा हालात से समझौता किया है, उन्हें स्वीकार करना तो दूर की बात है।"

  • अधिकारों की वापसी के लिए प्रतिबद्धता: उन्होंने दोहराया कि वे और उनकी पार्टी (नेशनल कांफ्रेंस) जम्मू-कश्मीर के साथ किए गए बदलावों को पलटने, छीने गए अधिकारों को वापस पाने और राज्य की पहचान की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

घाटी में राजनीतिक माहौल और सुरक्षा व्यवस्था

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा आर्टिकल 370 और 35A हटाए जाने के बाद से ही राज्य का दर्जा और विशेषाधिकार क्षेत्रीय राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं:

  • विपक्ष और सत्ता पक्ष का आमना-सामना: जहां एक ओर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह और पूर्व सीएम महबूबा मुफ़्ती जैसे क्षेत्रीय नेता आर्टिकल 370 की बहाली को मुख्य एजेंडा बता रहे हैं, वहीं केंद्र सरकार घाटी में विकास और शांति को अपनी मुख्य उपलब्धि के रूप में रेखांकित कर रही है।

  • सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम: 7वीं वर्षगांठ के मद्देनजर पूरे श्रीनगर और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और जांच अभियान तेज कर दिए गए हैं।

बेबाक24 टेक

आर्टिकल 370 हटने के सात साल बाद भी जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक असंतोष और अधिकारों की मांग पूरी तरह से शांत नहीं हुई है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के मुख्यमंत्री का यह बयान दर्शाता है कि राज्य के पुनर्गठन और पहचान का मुद्दा आने वाले समय में भी केंद्र और राज्य के रिश्तों में एक प्रमुख बहस का कारण बना रहेगा।



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