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सोनम वांगचुक की अपील के बाद छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने पिया पानी; 4 दिन बाद तोड़ी अनशन की जिद

by admin@bebak24.com on | 2026-08-05 17:19:55

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सोनम वांगचुक की अपील के बाद छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने पिया पानी; 4 दिन बाद तोड़ी अनशन की जिद

रांची : झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और लगातार हो रहे पेपर लीक के खिलाफ मोरहाबादी मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने प्रसिद्ध पर्यावरणविद और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से फोन पर बातचीत के बाद पानी पी लिया है। डॉक्टरों की गंभीर चेतावनी और वांगचुक के व्यक्तिगत परामर्श के बाद महतो ने अपनी भूख हड़ताल में ढील देने का फैसला किया।

सोनम वांगचुक और देवेंद्रनाथ महतो की बातचीत

2 अगस्त से पूर्ण अनशन पर बैठे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्रनाथ महतो की तबीयत बिगड़ने पर सोनम वांगचुक ने उनसे दूरभाष पर बात की:

  • महतो का दर्द: देवेंद्रनाथ महतो ने कहा, "मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर था। राज्य में पिछले 26 वर्षों से लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और सरकार छात्रों के हित में कोई फैसला नहीं ले रही। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि पानी न लेने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।"

  • वांगचुक की सलाह: सोनम वांगचुक ने अपील करते हुए कहा, "देवेंद्र जी, आप पानी पीजिए, पानी न पीना आत्महत्या के समान होगा। आंदोलन लंबा खींच सकता है, इसमें हफ्तों का समय लग सकता है। उम्मीद है कि सरकार को जल्द सद्बुद्धि आएगी और वह छात्रों के हित में फैसला लेगी।"

क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?

रांची के मोरहाबादी मैदान में जारी इस आंदोलन के पीछे युवाओं और अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • सीबीआई जांच: राज्य में हुई पिछली सभी भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच।

  • कड़े कानून का क्रियान्वयन: पेपर लीक माफिया और इसमें संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई।

  • पारदर्शी परीक्षा कैलेंडर: राज्य सरकार द्वारा पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रियाओं का निर्धारण।

बेबाक24 टेक

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा अब केवल स्थानीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के असंतोष की आवाज बन चुका है। सोनम वांगचुक के हस्तक्षेप से देवेंद्रनाथ महतो की जान तो बच गई है, लेकिन छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। यदि राज्य सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और पेपर लीक पर कड़े कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन आने वाले समय में चुनावी समर में बड़ा रूप ले सकता है।



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