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राष्ट्र निर्माण और संस्कृति संरक्षण ही संघ का मूल ध्येय: सुनील अंबेकर

by on | 2026-06-03 21:16:47

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राष्ट्र निर्माण और संस्कृति संरक्षण ही संघ का मूल ध्येय: सुनील अंबेकर


​ देश के हर परिवार तक पहुंचने का लक्ष्य, 'पंच परिवर्तन' से दूर होंगी सामाजिक कुरीतियां

​ ज्ञानवापी और मथुरा पर बोले- 'देश का सिस्टम सही दिशा में कर रहा काम'

लखनऊ/वाराणसी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने कहा है कि संघ का मुख्य ध्येय राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाना है। राष्ट्र के नागरिकों के व्यक्तित्व निर्माण और देश सेवा के लिए समर्पित स्वयंसेवक तैयार करने के उद्देश्य से देश भर में प्रतिदिन 88 हजार दैनिक शाखाएं लगाई जा रही हैं। संघ का लक्ष्य देश के हर गांव और हर बस्ती तक दैनिक शाखा का विस्तार कर नागरिकों के मन में 'राष्ट्र प्रथम' की भावना जागृत करना है। अपने शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संघ देश के हर परिवार तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है।

​वह लखनऊ/वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सह प्रांत प्रचारक चंद्रशेखर, जिला कार्यवाह संदीप, सह विभाग प्रचारक सौरभ, वर्ग पालक रविंद्र चौहान और देवेंद्र समेत कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।

​ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ 'पंच परिवर्तन' का संकल्प

​सुनील अंबेकर ने बताया कि समाज में फैली कुरीतियों और विसंगतियों को दूर करने के लिए संघ 'पंच परिवर्तन' के सिद्धांत पर विशेष जोर दे रहा है। सामाजिक सद्भाव बैठकों के माध्यम से समाज में फैले जातिवाद के जहर को पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है, जो हमेशा देशहित और समाजहित को सर्वोपरि मानता है।

​ युवा सोच में बदलाव, तकनीक के साथ संस्कृति का मेल

​युवाओं की बदलती सोच पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आज देश के युवाओं की मानसिकता में बड़ा सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है। आज का युवा न केवल तकनीक (Technology) को अपना रहा है, बल्कि अपनी संस्कृति और आध्यात्मिकता से भी गहराई से जुड़ रहा है। यही मेल भारत के 'विश्व गुरु' बनने की दिशा में सबसे बड़ा और सकारात्मक कारक साबित होगा।

​ काशी-मथुरा पर बोले: व्यवस्था सही दिशा में सक्रिय

​मथुरा और काशी की ज्ञानवापी को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने कहा, "बीते कुछ समय से देश के भीतर सारा सिस्टम उचित दिशा में काम कर रहा है। देश का समाज अब पूरी तरह जागृत हो चुका है। न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका मिलकर देश की सांस्कृतिक व धार्मिक विरासतों के संरक्षण के लिए अपने-अपने दायरे में रहते हुए काम कर रही हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत एक सांस्कृतिक राष्ट्र है, जहां अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासतों का संरक्षण बेहद जरूरी है।

​ 'लव जिहाद' पर प्रशासनिक सक्रियता के साथ सामाजिक जागरूकता जरूरी

​हाल के दिनों में चर्चा में रहे 'लव जिहाद' के मामलों पर अंबेकर ने कहा कि इस विषय पर पूरे समाज का जागरूक होना अनिवार्य है। किसी एक संगठन या कुछ गिने-चुने लोगों के प्रयास से समाज में मुकम्मल बदलाव नहीं आ सकता। हालांकि, उन्होंने संतोष जताते हुए यह भी जोड़ा कि ऐसे मामलों में प्रशासन भी मुस्तैदी से अपनी कार्रवाई कर रहा है, और यह प्रशासनिक सक्रियता इन मामलों को रोकने में काफी सहायक साबित हो रही है।



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