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पंचतत्व में विलीन हुए निशानेबाज जसपाल राणा, राजकीय सम्मान के साथ काशी में अंतिम संस्कार

by on | 2026-06-13 22:15:25

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पंचतत्व में विलीन हुए निशानेबाज जसपाल राणा, राजकीय सम्मान के साथ काशी में अंतिम संस्कार

सन्तोष राय

विशेष ब्यूरो, वाराणसी:‌ भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज खिलाड़ी और देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले जसपाल राणा शनिवार को काशी की पावन धरती पर पंचतत्व में विलीन हो गए। मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके निधन से खेल जगत सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। इसे भारतीय खेल इतिहास की एक अपूर्णीय क्षति माना जा रहा है।

​अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, पंकज सिंह ने दिया कंधा

​इससे पूर्व, दिवंगत जसपाल राणा के पार्थिव शरीर को शिवपुर स्थित चांदमारी रिंग रोड के 'द कासा रिजॉर्ट' में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। देश के इस महान चैंपियन को श्रद्धांजलि देने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में खेल प्रेमी, प्रशंसक, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी रिसॉर्ट पहुंचे।

​रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र एवं भाजपा विधायक पंकज सिंह ने भी वहां पहुंचकर दिवंगत आत्मा को पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ अर्थी को कंधा देकर अंतिम यात्रा की शुरुआत की।

​मणिकर्णिका घाट पर दी गई सम्मान गारद

​पार्थिव शरीर जब मणिकर्णिका घाट पहुंचा, तो वहां का माहौल बेहद गमगीन हो गया। अंतिम संस्कार के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों द्वारा उन्हें 'सम्मान गारद' (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई। उपस्थित जनसमुदाय ने नम आंखों से अपने चहेते खिलाड़ी को अंतिम विदाई दी। इस दौरान खेल संघों के पदाधिकारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और उनके परिवार के सदस्य मुख्य रूप से मौजूद रहे।

​देश को दिलाए कई ऐतिहासिक गौरव

​जसपाल राणा का खेल करियर शानदार उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने अपनी सटीक निशानेबाजी के दम पर वैश्विक पटल पर भारत का मान बढ़ाया।

एशियाई खेलों में स्वर्ण: उन्होंने साल 1998 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था।


राष्ट्रीय सम्मान: खेल के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार और बाद में युवा खिलाड़ियों को तराशने के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया था।


सहयोगी खिलाड़ियों ने जताया दुख

अंतिम विदाई देने पहुंचे शूटर संदीप कुमार ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, "जसपाल राणा ने भारतीय निशानेबाजी को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया, वह हमेशा याद रखा जाएगा। वे न सिर्फ एक बेहतरीन खिलाड़ी थे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी रहेंगे।"

​काशी की गोद में अंतिम विश्राम पाने वाले जसपाल राणा भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन खेल के मैदान पर उनके द्वारा स्थापित किए गए कीर्तिमान और पदक हमेशा अमर रहेंगे।



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