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संसद में बढ़ा सस्पेंस: FCRA बिल बुधवार को, सोमवार-मंगलवार के एजेंडे पर सरकार की चुप्पी

by admin@bebak24.com on | 2026-08-08 11:20:01

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संसद में बढ़ा सस्पेंस: FCRA बिल बुधवार को, सोमवार-मंगलवार के एजेंडे पर सरकार की चुप्पी

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। बुधवार के एजेंडे को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ है, लेकिन सोमवार और मंगलवार को सदन में क्या पेश किया जाएगा, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इसी अनिश्चितता ने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस को आशंका है कि सरकार सोमवार या मंगलवार को परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक सदन में ला सकती है। इसी वजह से पार्टी ने अपने सांसदों को इन दोनों दिनों सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप जारी किया है।

बुधवार को FCRA संशोधन विधेयक पर नजर

सरकार बुधवार को विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA में संशोधन से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि, इससे पहले के दो दिनों के लिए सरकार ने अभी अपना पूरा विधायी कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया है।

यही वजह है कि विपक्षी दलों की नजर सोमवार और मंगलवार की कार्यवाही पर टिकी हुई है।

परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा

संसद के गलियारों में जिस प्रस्ताव को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है, वह परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़ा संभावित संविधान संशोधन है।

इस प्रस्ताव के जरिए लोकसभा की मौजूदा सीटों की संख्या में बड़ा बदलाव किए जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा है। विपक्षी दलों को आशंका है कि सरकार अचानक इसे सदन में पेश कर सकती है।

कांग्रेस ने इसी संभावना को देखते हुए अपने सांसदों को दोनों सदनों में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं।

सरकार और विपक्ष के बीच फ्लोर मैनेजमेंट तेज

संसद में संभावित विधायी रणनीति के बीच सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने स्तर पर संख्या और समर्थन जुटाने में सक्रिय नजर आ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री विपक्षी और क्षेत्रीय दलों के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू समेत कई केंद्रीय मंत्रियों को अलग-अलग विपक्षी दलों से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है।

गृह मंत्री अमित शाह भी विभिन्न क्षेत्रीय दलों के नेताओं के संपर्क में बताए जा रहे हैं।

इन मुलाकातों को सिर्फ औपचारिक बातचीत के बजाय संसद में संभावित विधेयकों के लिए समर्थन जुटाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

अमित शाह ने स्पीकर ओम बिरला से की मुलाकात

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक करीब एक घंटे चली।

बैठक के बाद सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। हालांकि, यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब संसद में विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है।

छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मुद्दों पर विपक्ष सरकार से जवाब की मांग कर रहा है।

क्या मानसून सत्र के बाद बुलाया जा सकता है विशेष सत्र?

सूत्रों के मुताबिक, मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने के बावजूद सरकार तत्काल संसद का सत्रावसान नहीं कर सकती है। ऐसा होने पर कम समय में विशेष सत्र बुलाने का विकल्प सरकार के पास खुला रहेगा।

सत्ता पक्ष के स्तर पर 16 से 18 अगस्त के बीच परिसीमन विधेयक पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना को लेकर संकेत दिए गए हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक इसकी तारीख या एजेंडे की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोमवार और मंगलवार को सरकार संसद में कौन-सा विधायी कदम उठाती है। अगर इन दिनों परिसीमन या महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक सामने आता है, तो संसद में राजनीतिक टकराव बढ़ सकता है।

वहीं, अगर सरकार और विपक्ष के बीच किसी तरह का संवाद बनता है तो लंबे समय से जारी गतिरोध को खत्म करने का रास्ता भी खुल सकता है।

बेबाक24 टेक

संसद के अंतिम दिनों का यह सस्पेंस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार ने बुधवार का एजेंडा तो स्पष्ट किया है, लेकिन सोमवार और मंगलवार को लेकर अभी पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है।

अगर परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक अचानक सदन में आता है, तो यह सिर्फ एक सामान्य विधायी प्रक्रिया नहीं होगी। लोकसभा की सीटों के संभावित पुनर्विन्यास और महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों के कारण इसका सीधा असर देश की चुनावी राजनीति और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर पड़ सकता है।

फिलहाल सरकार की रणनीति और विपक्ष की तैयारी दोनों सोमवार से होने वाली कार्यवाही पर केंद्रित हैं। अब देखना होगा कि संसद में अगले दो दिन सिर्फ सस्पेंस बने रहते हैं या सरकार कोई बड़ा राजनीतिक दांव चलती है।



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