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सुहागिनों ने पूरे श्रद्धा और उत्साह से की वट सावित्री पूजा, बरगद की परिक्रमा कर मांगा पति की लंबी उम्र का वरदान

by on | 2026-05-16 16:36:14

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सुहागिनों ने पूरे श्रद्धा और उत्साह से की वट सावित्री पूजा, बरगद की परिक्रमा कर मांगा पति की लंबी उम्र का वरदान


बेबाक 24 डिजिटल डेस्क

बलिया: ​जनपद में शनिवार की सुबह अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने पूरे पारंपरिक विधि-विधान, श्रद्धा और उत्साह के साथ वट सावित्री का पूजन किया। इस पावन अवसर पर अलसुबह से ही गंगा घाटों और वट वृक्षों के नीचे सुहागिनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आस्था के इस महापर्व पर कई महिलाओं ने व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कामना की।

​गंगा में डुबकी और सोलह श्रृंगार कर पहुंचीं घाट

​शनिवार की भोर होते ही महिलाओं की दिनचर्या आस्था के रंग में रंगी नजर आई। सुबह-सुबह अनेक महिलाओं ने पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाई, वहीं कई महिलाओं ने घरों में ही स्नान-ध्यान कर पूर्ण सोलह श्रृंगार किया। सज-धजकर नवविवाहिताओं से लेकर बुजुर्ग महिलाओं का कारवां अपने नजदीकी वट (बरगद) वृक्ष की ओर चल पड़ा।

​'शेर-ए-बलिया' चित्तू पांडेय के गांव में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

​पूरे जिले के साथ-साथ महान स्वतंत्रता सेनानी और 'शेर-ए-बलिया' के नाम से विख्यात बलिया के प्रथम कलेक्टर चित्तू पांडेय के पैतृक गांव रट्टूचक (वैना) में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां नेशनल हाईवे 31 (NH-31) के किनारे स्थित ऐतिहासिक वट वृक्ष के नीचे अलसुबह से ही पूजन करने वाली महिलाओं की खासी भीड़ जमा हो गई। रंग-बिरंगी साड़ियों में सजी महिलाओं ने वृक्ष के नीचे बैठकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और वट वृक्ष के तने पर सूत का कच्चा धागा लपेटकर (परिक्रमा कर) अपने अखंड सुहाग की मन्नत मांगी।

​त्रिदेवों का वास और सत्यवान-सावित्री की अमर कथा

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट सावित्री की पूजा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और अटूट सुहाग के लिए करती हैं। पौराणिक ग्रंथों में बरगद (वट) के पेड़ में त्रिदेव— ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। चूंकि इस पेड़ की आयु बहुत लंबी होती है, इसलिए इसे अमरता और दीर्घायु का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।

​इस व्रत का सीधा संबंध पौराणिक कथा से है, जिसमें सती सावित्री ने अपनी दृढ़ निष्ठा, बुद्धिमत्ता और अगाध प्रेम के बल पर यमराज के पाश से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस छीन लिए थे। बरगद की दीर्घायु और यमराज को झुकाने वाली सावित्री के इसी अदम्य साहस व श्रद्धा के स्वरूप इस व्रत को 'वट सावित्री' कहा जाता है। आधुनिक युग की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी बलिया की नारी शक्ति ने आज इस प्राचीन परंपरा को पूरी आस्था और बेबाकी के साथ जीवंत रखा।



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