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आँसुओं के समंदर में डूबा 'समाजवादी परिवार', प्रतीक यादव पंचतत्व में विलीन

by on | 2026-05-14 18:49:40

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आँसुओं के समंदर में डूबा 'समाजवादी परिवार', प्रतीक यादव पंचतत्व में विलीन


लखनऊ: राजधानी का बैकुंठधाम शनिवार को एक ऐसी विदाई का साक्षी बना, जिसने हर किसी का कलेजा चीर कर रख दिया। समाजवादी कुनबे के युवा चेहरे प्रतीक यादव आज पंचतत्व में विलीन हो गए। श्मशान घाट का माहौल इतना गमगीन था कि वहां मौजूद पत्थरदिल इंसान की आंखें भी छलक आईं।

अपर्णा के सब्र का बांध टूटा, ससुर ने दी मुखाग्नि

​अंतिम संस्कार की रस्में जब शुरू हुईं, तो दृश्य हृदयविदारक था। प्रतीक यादव की पत्नी अपर्णा यादव अपनी सुध-बुध खो बैठी थीं। बेटियों को सीने से लगाए अपर्णा जब फूट-फूटकर रोईं, तो वहां मौजूद हर शख्स की रूह कांप गई। जिस जीवनसाथी के साथ उन्होंने लंबी उम्र के सपने बुने थे, आज उसे अंतिम विदाई देना उनके लिए असहनीय था।

​हालाँकि, श्मशान घाट पर मौजूद लोग तब हैरान रह गए जब प्रतीक के ससुर पत्रकार अरविंद बिष्ट ने नम आंखों से अपने दामाद को मुखाग्नि दी। श्मशान घाट पर सन्नाटे के बीच एक सवाल हर किसी के जेहन में तैरता रहा— आखिर कर्मकांड से क्यों पीछे हटा मुलायम सिंह यादव का कुनबा? सैफई परिवार के किसी सदस्य द्वारा मुखाग्नि न दिए जाने की चर्चाएं वहां दबी जुबान में होती रहीं।

राजनीतिक सरहदें भूला 'शोक'

​प्रतीक यादव को अंतिम विदाई देने के लिए आज विचारधाराओं की दीवारें गिर गईं। एक तरफ जहाँ अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव और धर्मेंद्र यादव अपने भाई को खोने के गम में डूबे नजर आए, वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी परिवार के पास पहुंचकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। भाजपा और सपा, दोनों ही दलों के दिग्गजों का जमावड़ा यह बता रहा था कि प्रतीक ने रिश्तों की कमाई कितनी बखूबी की थी।

भाई का साथ: साये की तरह रहे अखिलेश

​अपनों को खोने का दर्द क्या होता है, यह अखिलेश यादव के चेहरे पर साफ दिख रहा था। अस्पताल से लेकर श्मशान घाट की अंतिम क्रिया तक, अखिलेश एक बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए साये की तरह परिवार के साथ खड़े रहे। उन्होंने भारी मन से कहा— "प्रतीक हमेशा अपनी एक अलग पहचान बनाने और कुछ बड़ा करने का जुनून रखते थे, उनका जाना एक अपूरणीय क्षति है।"



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