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काशी-तमिल संगमम का भव्य आगाज़: पीएम के दिल में बसते हैं तमिल लोग - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित

by admin@bebak24.com on | 2025-12-02 22:20:50

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काशी-तमिल संगमम का भव्य आगाज़: पीएम के दिल में बसते हैं तमिल लोग - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया संबोधित



​वाराणसी: तमिलनाडु और काशी के प्राचीन सांस्कृतिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाने वाले 'काशी-तमिल संगमम 4.0' का भव्य शुभारंभ मंगलवार को वाराणसी के नमो घाट पर हुआ। इस गौरवशाली आयोजन का शुभारंभ तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, और पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलासनाथन ने किया।
अतिथियों का भव्य स्वागत
​वाराणसी एयरपोर्ट पर सीएम योगी आदित्यनाथ समेत सभी गणमान्य अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिसके बाद वे सीधे कार्यक्रम स्थल नमो घाट पहुँचे। इस अवसर पर तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री भी उपस्थित रहे।
राज्यपाल आर.एन. रवि: पीएम मोदी के दिल में बसते हैं तमिल लोग
​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भावुक होकर कहा कि, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में तमिलनाडु और तमिल लोग बसते हैं।" राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने दोनों क्षेत्रों के बीच की दूरी और सांस्कृतिक अलगाव के दर्द को समझा और इसी दूरदर्शिता के परिणामस्वरूप इस 'काशी तमिल संगमम' यात्रा की शुरुआत हुई, जो अब भारत की राष्ट्रीय एकता और 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को साकार कर रही है।
​ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन: विरासत का सम्मान और राष्ट्रीय एकता का संदेश
​अपने संबोधन में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक संगम की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन और जीवंत सभ्यता का पुनरुत्थान है।
​पुरानी परंपराओं का संगम
​मुख्यमंत्री ने कहा, "काशी-तमिल संगमम उस पुरानी परंपरा का एक अनूठा उदाहरण है, जब ज्ञान और संस्कृति के आदान-प्रदान के लिए दूर-दूर की यात्राएँ की जाती थीं। काशी और तमिलनाडु दोनों ही भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी हैं। दोनों का संबंध सदियों पुराना है, जो शिक्षा, कला और अध्यात्म के धागे से बुना गया है। आज यह आयोजन प्रधानमंत्री मोदी की प्रेरणा से हमें अपनी जड़ों से फिर से जोड़ रहा है।"
​'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना
​सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न की सराहना करते हुए कहा कि, "प्रधानमंत्री जी ने देश के उत्तर और दक्षिण को जोड़ने के लिए एक सांस्कृतिक सेतु का निर्माण किया है। यह संगमम 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की परिकल्पना को मूर्तरूप देता है। यह दिखाता है कि भाषा और खान-पान अलग होने के बावजूद हम एक ही भारतीय संस्कृति की संतानें हैं।"
​तमिल संस्कृति और भाषा का गौरव
​मुख्यमंत्री ने इस वर्ष की थीम 'तमिल करकलाम' (तमिल सीखें) का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तमिल, दुनिया की सबसे प्राचीन और समृद्ध भाषाओं में से एक है। उन्होंने कहा, "यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि काशी की धरती पर तमिल सीखने-सिखाने की पहल हो रही है। यह भाषा का आदान-प्रदान केवल बच्चों को ज्ञान ही नहीं देगा, बल्कि दोनों क्षेत्रों की जनता के बीच भावनात्मक दूरी को भी कम करेगा।"
​पर्यटन और विकास पर जोर
​मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु से आए 1400 से अधिक प्रतिनिधियों का काशी में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन काशी के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा। उन्होंने प्रतिनिधियों से अनुरोध किया कि वे काशी के नए स्वरूप, श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की दिव्यता और नमो घाट की भव्यता को देखें और अपने अनुभव दक्षिण में जाकर साझा करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संगमम दोनों राज्यों के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊँचाई देगा।
​'आओ तमिल सीखें' थीम पर विशेष जोर
​इस बार का आयोजन 'तमिल करकलाम' यानी तमिल सीखें की थीम पर आधारित है।
​शैक्षणिक पहल: आईआईटी मद्रास के 'विद्या शक्ति पोर्टल' की मदद से 650 स्कूलों के लगभग 15,000 बच्चों को तमिल भाषा सिखाई जाएगी।
​शिक्षकों का योगदान: इस कार्य के लिए तमिलनाडु से 50 शिक्षक काशी आए हैं, जो यहाँ के विद्यालयों में तमिल भाषा और संस्कृति का परिचय देंगे और छात्रों को तमिल सिखाने की जिम्मेदारी निभाएँगे।
दो चरणों में होगा आयोजन
​कमिश्नर एस. राजलिंगम ने जानकारी दी कि 'काशी तमिल संगमम' दो चरणों में 31 दिसंबर तक चलेगा:
​पहला चरण: 2 दिसंबर से 15 दिसंबर तक काशी में।
​दूसरा चरण: 16 दिसंबर से 31 दिसंबर तक चेन्नई में।
​सोमवार देर रात ही तमिलनाडु से अतिथियों की पहली ट्रेन बनारस स्टेशन पहुँची, जहाँ जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने उनका भव्य स्वागत किया।
अतिथियों का भ्रमण कार्यक्रम
​तमिल संगमम 4.0 के डेलीगेट्स काशी में कई महत्वपूर्ण स्थानों का भ्रमण करेंगे:
​गंगा स्नान और दर्शन: सबसे पहले हनुमान घाट पहुँचकर गंगा स्नान और दक्षिण भारतीय परंपरा से जुड़े मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे।
​बाबा विश्वनाथ धाम: श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करेंगे और माँ अन्नपूर्णा रसोई में प्रसाद ग्रहण करेंगे।
​बीएचयू: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में एकेडमिक कार्यक्रमों में शामिल होंगे और विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे।
​मंगलवार को कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर दयालु, आईआईटी मद्रास निदेशक प्रो. वी कामकोटि, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, शिक्षा मंत्रालय सचिव डॉ. विनीत जोशी समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस अवसर पर भरतनाट्यम और पारंपरिक तमिल नृत्य की संयुक्त प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति के अद्भुत संगम को दर्शाया।



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