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मजदूरों का 'काल' है अभिषेक काके! 10 साल पहले भी उड़ाए थे परखच्चे, अब कुर्की की तैयारी

by on | 2026-01-15 22:52:22

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मजदूरों का 'काल' है अभिषेक काके! 10 साल पहले भी उड़ाए थे परखच्चे, अब कुर्की की तैयारी

अजय सिंह 

सोनभद्र। ओबरा के रासपहरी में 15 नवंबर को हुए उस खौफनाक मंजर को लोग भूले नहीं थे कि अब इस मामले में पुलिस का बड़ा हंटर चला है। खून से सनी खदान के मामले में SIT ने चार और चेहरों को बेनकाब कर दिया है। इनके खिलाफ कोर्ट से गैर जमानती वारंट (NBW) जारी हो चुका है और अब पुलिस इनके घरों पर कुर्की का नोटिस चस्पा करने की तैयारी में है।

मुख्य आरोपी का पुराना 'खूनी' कनेक्शन

जांच में जो सबसे बड़ा नाम उछलकर सामने आया है, वह है अभिषेक सिंह उर्फ 'काके'। जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि काके इस खदान का सिर्फ संचालक नहीं, बल्कि मजदूरों के लिए 'साक्षात काल' है।

> बेबाक विशेष: यह कोई पहली बार नहीं है जब काके के हाथों पर मजदूरों का खून लगा हो। 10 साल पहले भी एक भीषण धमाके ने पूरे देश को दहला दिया था, जिसमें कई मजदूरों के चीथड़े उड़ गए थे। उस वक्त भी इस पूरी तबाही का मास्टरमाइंड अभिषेक सिंह काके ही निकला था और उसे जेल की हवा खानी पड़ी थी। इतिहास खुद को दोहरा रहा है, बस लाशें नई हैं!

इन 4 नए गुनहगारों पर कसा शिकंजा

SIT की गहन तफ्तीश के बाद न्यायालय ने इन आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किया है:

 * अभिषेक सिंह उर्फ काके (संचालक एवं मुख्य साजिशकर्ता)

 * देवेंद्र राय उर्फ मुन्ना राय (काले कारोबार का बड़ा हिस्सेदार)

 * अरविंद कुमार यादव

 * अनिमेष सिंह

कार्रवाई: पुलिस अब इनके खिलाफ धारा 82 CRPC (फरारी की उद्घोषणा) की कार्रवाई कर रही है। अगर ये जल्द हाजिर नहीं हुए, तो ढोल-नगाड़ों के साथ इनकी संपत्ति कुर्क कर ली जाएगी।

अपडेट: कौन जेल में और किसे मिली 'ढाल'?

इस खूनी खेल में कुल 14 आरोपी चिह्नित किए गए थे:

 * जेल की सलाखों में: माइंस मैनेजर समेत 4 आरोपी पहले ही अंदर किए जा चुके हैं।

 * कोर्ट से राहत: खदान मालिक मधुसूदन सिंह और दिलीप केसरी को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिल गया है, जिससे पुलिस के हाथ फिलहाल बंधे हैं।

 * फरार: काके समेत 4 आरोपी अभी भी पुलिस को चकमा दे रहे हैं।

फ्लैशबैक: वो चीखें, वो मलबे और वो तबाही

याद दिला दें कि 2015 मे रासपहारी स्थित खदान के विस्फोटक गोदाम में हुए धमाके में 7 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी। धमाका इतना भीषण था कि 150 मीटर के दायरे में इंसानी मांस के लोथड़े बिखरे पड़े थे। जांच में साफ हुआ कि नियमों को जूते की नोक पर रखकर जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर का अवैध जखीरा जमा किया गया था।

CO हर्ष पांडेय की अगुवाई वाली SIT अब एक-एक कड़ी जोड़कर काके के पूरे साम्राज्य को ध्वस्त करने में जुटी है। प्रशासन का दावा है कि 'मौत के सौदागर' चाहे कितने भी रसूखदार क्यों न हों, इस बार बच नहीं पाएंगे।

बड़ा सवाल: क्या 10 साल पहले की तरह काके फिर कानून की आंखों में धूल झोंक पाएगा? या इस बार उसे उसके किए की सजा मिलेगी?

देखते रहिए, बेबाक 24।



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