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सीमा पर जलाशय को लेकर दावा, नेपाल की तबाही के बीच बढ़ी चिंता

by admin@bebak24.com on | 2026-08-29 13:42:07

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सीमा पर जलाशय को लेकर दावा, नेपाल की तबाही के बीच बढ़ी चिंता

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

नेपाल में भीषण बाढ़ से मची तबाही के बीच भारत-चीन सीमा से जुड़े एक जलाशय को लेकर सोशल मीडिया पर नया दावा सामने आया है। चीन की लोकतंत्र समर्थक संस्था के प्रमुख वानजुन शिए ने दावा किया है कि सीमा क्षेत्र में एक जलाशय में पानी चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया है और बांध टूटने की स्थिति में भारत की ओर बाढ़ का पानी आ सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वानजुन शिए ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए जलाशय की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उनके दावे में जलाशय का स्पष्ट नाम, सटीक स्थान, जलस्तर या बांध की तकनीकी स्थिति जैसी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में फिलहाल इसे केवल एक अपुष्ट दावा माना जा रहा है।

नेपाल की बाढ़ के बाद क्यों बढ़ी चिंता

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ग्लेशियर टूटने, मलबे के बहाव और अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से नेपाल में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ।

इसी पृष्ठभूमि में हिमालयी क्षेत्र में मौजूद ग्लेशियरों, झीलों और जलाशयों की स्थिति पर निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से हिमालय में ग्लेशियल झीलों के बढ़ते आकार और अचानक बाढ़ की आशंका को लेकर चेतावनी देते रहे हैं।

क्या भारत में आ सकती है बाढ़?

केवल सीमा के पास किसी जलाशय के होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके टूटने पर बाढ़ सीधे भारत में पहुंचेगी। इसके लिए जलाशय की वास्तविक स्थिति, उससे जुड़ी नदी, पानी की मात्रा, ऊंचाई और जलप्रवाह की दिशा जैसी जानकारी जरूरी होगी।

इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आए दावे को फिलहाल भारत के लिए निश्चित बाढ़ का खतरा बताना उचित नहीं होगा।

नेपाल में अभी भी खतरा बरकरार

नेपाल में बाढ़ के बाद कई स्थानों पर मलबे से प्राकृतिक जलाशय और अवरोध बने हैं। इनमें पानी के बढ़ते स्तर से दोबारा अचानक बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। इसी वजह से संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव दलों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

हिमालयी क्षेत्र में लगातार बदलती परिस्थितियों को देखते हुए सीमापार जलस्रोतों की निगरानी, उपग्रह से समय-समय पर आकलन और समय रहते चेतावनी तंत्र को मजबूत करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



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