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ईरान पर अमेरिका की दोहरी घेराबंदी: मिसाइल हमले का विकल्प खुला, नेतन्याहू ने प्रतिबंधों का किया स्वागत

by admin@bebak24.com on | 2026-08-25 13:55:49

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ईरान पर अमेरिका की दोहरी घेराबंदी: मिसाइल हमले का विकल्प खुला, नेतन्याहू ने प्रतिबंधों का किया स्वागत

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

ईरान को लेकर अमेरिका ने आर्थिक दबाव के साथ सैन्य विकल्प भी खुला रखा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट किया है कि परिस्थितियां बिगड़ने पर वॉशिंगटन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसमें रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है। इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान के तेल और वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है, जबकि इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया है।

हेगसेथ की दोटूक, सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला

विस्कॉन्सिन के ओशकोश में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हेगसेथ से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना पर सवाल किया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने सैन्य विकल्प को खत्म नहीं किया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री के मुताबिक, यदि ईरान अमेरिकी सेना के खिलाफ कोई ऐसी कार्रवाई करता है, जिसे वॉशिंगटन गंभीर सीमा उल्लंघन मानता है, तो अमेरिका जवाबी कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर होर्मुज जलडमरूमध्य या ईरान के आसपास के किसी भी क्षेत्र में सैन्य शक्ति का इस्तेमाल किया जा सकता है।

होर्मुज पर अमेरिका का दावा, जहाजों की सुरक्षा का भरोसा

हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है और वहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा करने की क्षमता रखती है।

उन्होंने कहा कि ईरान के पास समुद्री मार्ग और तेल आपूर्ति को प्रभावित करने की कुछ क्षमता जरूर है, लेकिन अमेरिका के पास इस क्षेत्र में अधिक मजबूत सैन्य क्षमता है। वॉशिंगटन का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति को जारी रखा जा सकता है।

ईरानी सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचाने का दावा

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की नौसेना, रडार और मिसाइल प्रणालियों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने माना कि ईरान के पास अब भी सैन्य क्षमता मौजूद है।

अमेरिका की रणनीति का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान पर इतना आर्थिक दबाव बनाना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोबारा बातचीत की मेज पर लौटे।

'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' से आर्थिक घेराबंदी

अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत ईरान के तेल कारोबार, वित्तीय नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले तंत्र को निशाना बनाया जा रहा है।

अमेरिका ने करीब 60 संस्थाओं, व्यक्तियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें कथित तौर पर ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार, सैन्य गतिविधियों तथा खरीद नेटवर्क से जुड़े लोग और संस्थाएं शामिल हैं।

तेल तस्करी और वित्तीय नेटवर्क पर निगाह

बेसेंट के अनुसार अमेरिकी प्रशासन उन वित्तीय मध्यस्थों, जहाजों, फ्रंट कंपनियों और अन्य नेटवर्क को निशाना बना रहा है, जिनका इस्तेमाल ईरान प्रतिबंधों से बचने और विदेशी मुद्रा हासिल करने के लिए करता है।

अमेरिका का लक्ष्य ईरानी सरकार तथा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स तक पहुंचने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना है।

ईरान का जवाब—मुश्किल दौर से निकलेंगे

अमेरिकी दबाव के बीच ईरानी सरकार की प्रवक्ता फातेमेह मोहाजेरानी ने कहा कि देश आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद मौजूदा संकट से निपटने की क्षमता रखता है।

ईरान का रुख फिलहाल अमेरिका के सामने झुकने के बजाय आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर दबाव का सामना करने का है।

नेतन्याहू ने अमेरिकी कार्रवाई का किया समर्थन

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के नए प्रतिबंधों का स्वागत किया। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कार्रवाई ईरानी सरकार और उसकी आक्रामक गतिविधियों का समर्थन करने वालों पर दबाव बढ़ाएगी।

इस्राइल लंबे समय से ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताता रहा है।

अब क्या हो सकता है?

अमेरिका फिलहाल आर्थिक प्रतिबंधों को प्राथमिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन साथ ही सैन्य कार्रवाई का रास्ता खुला रखे हुए है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील बिंदु बनकर उभर रहा है।

अगर ईरान और अमेरिका के बीच सीधा सैन्य टकराव बढ़ता है या होर्मुज से तेल परिवहन प्रभावित होता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल कीमतों, व्यापार और महंगाई पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

बेबाक24 निष्कर्ष:
ईरान के खिलाफ अमेरिका की रणनीति अब साफ तौर पर दो स्तरों पर चल रही है—पहले आर्थिक घेराबंदी और उसके साथ सैन्य दबाव का विकल्प। नेतन्याहू के समर्थन से इस नीति को क्षेत्रीय राजनीतिक समर्थन भी मिलता दिख रहा है। आने वाले दिनों में असली परीक्षा यह होगी कि आर्थिक दबाव ईरान को बातचीत की मेज तक लाता है या संकट सैन्य टकराव की दिशा में बढ़ता है।



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