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काशी में गंगा-वरुणा का विकराल रूप: बैराजों से छूटे पानी से खतरे का निशान लांघकर 72 मीटर पहुंचा जलस्तर, तटीय इलाकों में हाहाकार

by on | 2026-08-23 05:54:15

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काशी में गंगा-वरुणा का विकराल रूप: बैराजों से छूटे पानी से खतरे का निशान लांघकर 72 मीटर पहुंचा जलस्तर, तटीय इलाकों में हाहाकार

वाराणसी। ऊपरी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश और बैराजों से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण काशी में गंगा और वरुणा नदियों ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर खतरे के निशान (71.26 मीटर) को पार कर 72 मीटर के गंभीर आंकड़े पर पहुंच गया है। गंगा के इस उफान से वरुणा नदी में बने पलट प्रवाह (बैकवॉटर) ने स्थिति को और अधिक भयावह बना दिया है, जिससे शहरी बस्तियों से लेकर देहात के खेतों तक जलप्रलय जैसा मंजर देखने को मिल रहा है।

बैराजों और सहायक नदियों के पानी ने बढ़ाई आफत

गंगा और यमुना के जलस्तर में हो रही इस बेतहाशा वृद्धि के पीछे बैराजों से लगातार छोड़ा जा रहा पानी और सहायक नदियों का उफान मुख्य वजह है। गंगा नदी में कानपुर बैराज से 3.01 लाख क्यूसेक, जबकि नरौरा बांध और हरिद्वार बैराज से लगभग दो-दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, यमुना नदी में चंबल, केन और बेतवा नदियां उफान पर हैं। यमुना में हथिनीकुंड और माताटीला बैराज से करीब चार लाख क्यूसेक पानी आ रहा है। बांदा में केन, हमीरपुर में बेतवा और चिल्ला घाट पर यमुना तेजी से बढ़ रही है। टोंस, बेलन, सिवटी और लपरी जैसी अन्य सहायक नदियों का पानी मिलकर गंगा-यमुना के प्रवाह को और विकराल बना रहा है, जिसका सीधा असर काशी के तटीय क्षेत्रों में जलस्तर के रूप में दिख रहा है।

वरुणा के पलट प्रवाह से बस्तियों में पानी, पलायन तेज़

वरुणा के बैकवॉटर के तीव्र प्रवाह के कारण सलारपुर, कोनिया, सरैया और हुकुलगंज की घनी आबादी वाले निचले इलाकों में पानी प्रवेश कर गया है। सैकड़ों घरों में दो से तीन फीट तक पानी भर जाने से लोग छतों पर शरण लेने या मकानों में ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन द्वारा शहर में स्थापित बाढ़ राहत केंद्रों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है, जहां प्रभावित परिवारों को शिफ्ट किया जा रहा है।

सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न, किसानों पर पड़ी दोहरी मार

बाढ़ का सबसे भीषण असर ग्रामीण आंचल और दियारा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। गंगा और वरुणा के तटवर्ती इलाकों में लगी सैकड़ों एकड़ सब्जियों और खरीफ की खड़ी फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं। अचानक बढ़े जलस्तर से किसानों की महीनों की मेहनत पानी में बह गई है, जिससे काश्तकारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

घाटों का संपर्क टूटा, सावन के आखिरी सोमवार पर High Alert

गंगा के बढ़ाव से राजघाट से लेकर अस्सी घाट तक के सभी 84 घाटों का आपसी संपर्क पूरी तरह कट चुका है। घाटों के किनारे स्थित कई प्रसिद्ध मंदिर जलमग्न हो गए हैं। सावन के अंतिम सोमवार को ध्यान में रखते हुए जल पुलिस प्रभारी सुधीर त्रिपाठी के नेतृत्व में राजघाट से अस्सी तक सुरक्षा व्यवस्था चुस्त कर दी गई है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मोटरबोट्स प्रभावित इलाकों में 24 घंटे गश्त कर रही हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग ने आगामी 24 से 48 घंटों में पूर्वांचल समेत ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जिससे जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका है। स्थानीय प्रशासन ने तटीय इलाकों के निवासियों को नदियों के समीप न जाने और बेहद सतर्क रहने की अपील की है।



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