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राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बदला रुख, बोले- स्कूलों की कमियां बताना लोकतांत्रिक प्रक्रिया; समाधान संवाद से

by admin@bebak24.com on | 2026-08-22 16:13:02

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राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का बदला रुख, बोले- स्कूलों की कमियां बताना लोकतांत्रिक प्रक्रिया; समाधान संवाद से

जयपुर | बेबाक24 न्यूज़

राजस्थान में सरकारी विद्यालयों की स्थिति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के स्कूल निरीक्षण अभियान के बीच शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का रुख नरम पड़ता दिखाई दे रहा है। कुछ दिन पहले विद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सीजेपी पर सवाल उठाने वाले दिलावर ने अब कहा है कि सरकारी विद्यालयों की कमियों को सामने लाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और समस्याओं का समाधान संवाद, सहयोग और सकारात्मक सहभागिता से होना चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?

मदन दिलावर ने सामाजिक माध्यम पर लिखे अपने संदेश में कहा कि राजस्थान में सरकारी विद्यालयों को बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं, भवन निर्माण और मरम्मत, स्मार्ट कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, कक्षा-कक्ष और विद्यार्थियों से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “विद्यालयों की कमियों को सामने लाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, लेकिन समाधान का रास्ता संवाद, सहयोग और सकारात्मक सहभागिता से ही निकलता है।”

शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि सरकारी विद्यालय मजबूत होंगे तो राजस्थान का भविष्य मजबूत होगा।

कुछ दिन पहले सीजेपी पर था सवाल

मदन दिलावर का यह रुख उस समय आया है जब सीजेपी कार्यकर्ता राजस्थान के सरकारी विद्यालयों की स्थिति का निरीक्षण कर उनकी कमियां सामने ला रहे हैं।

इससे पहले शिक्षा मंत्री ने विद्यालयों को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बनाने की बात कही थी। शुक्रवार को उन्होंने सामाजिक माध्यम पर सीजेपी को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए विद्यालयों को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाने की अपील की थी।

शनिवार के बयान में हालांकि उनका स्वर अपेक्षाकृत संयमित रहा।

स्कूल निरीक्षण के दौरान हुआ था विवाद

यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब जयपुर ग्रामीण के रामपुरा-कंवरपुरा स्थित सरकारी विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंचे सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और उनके साथियों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया था।

सीजेपी ने आरोप लगाया था कि विद्यालय की खराब स्थिति देखने पहुंचे उनके कार्यकर्ताओं का कुछ लोगों ने विरोध किया और उनके साथ मारपीट की। संगठन ने घटना के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका का आरोप लगाया था।

दूसरी ओर, विरोध कर रहे स्थानीय लोगों ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि विद्यालय की मरम्मत के लिए पहले ही 12 लाख रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं।

इस विवाद के बाद राजस्थान की राजनीति में सरकारी विद्यालयों की स्थिति और उनके निरीक्षण को लेकर बहस तेज हो गई थी।

अब सरकार और सीजेपी के बीच संवाद की गुंजाइश?

शिक्षा मंत्री के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि सरकार अब विद्यालयों की कमियों को सामने लाने वाले प्रयासों को पूरी तरह खारिज करने के बजाय उन्हें संवाद के माध्यम से देखने की कोशिश कर रही है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कथित राजनीतिक दलों से जुड़े लोग विद्यालयों में जाकर अनावश्यक रूप से माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

इसलिए सरकार का रुख पूरी तरह बदल गया है या केवल विद्यालयों की समस्याओं को लेकर संवाद का रास्ता अपनाने की कोशिश है, यह आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा।

बेबाक24 का नजरिया

सरकारी विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने लाने का अधिकार नागरिकों और संगठनों के पास होना चाहिए, लेकिन विद्यालयों का निरीक्षण राजनीतिक टकराव का मंच नहीं बनना चाहिए। सरकार के लिए भी जरूरी है कि सामने लाई गई कमियों की जांच करे और सही पाए जाने पर कार्रवाई करे।



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