by admin@bebak24.com on | 2026-08-20 15:44:44
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कोलकाता | बेबाक24 न्यूज़
पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय में देर रात छात्र संगठनों के बीच झड़प की घटना सामने आई। इस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एसएफआई समेत वामपंथी छात्र संगठनों के समर्थक आमने-सामने आ गए। घटना के बाद कुछ समय के लिए परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही।
यह विवाद एसएफआई की ओर से बुलाई गई सामान्य सभा की बैठक को लेकर शुरू हुआ। एबीवीपी ने बैठक बुलाए जाने के अधिकार और प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच विवाद बढ़ गया।
जानकारी के मुताबिक, एसएफआई ने विश्वविद्यालय परिसर में सामान्य सभा की बैठक बुलाने की पहल की थी। एबीवीपी ने इस बैठक के आयोजन के अधिकार पर आपत्ति जताई।
इसी मुद्दे को लेकर छात्र संगठनों के बीच पहले बहस और फिर तनाव की स्थिति बनी। कुछ ही देर में विवाद कथित तौर पर झड़प में बदल गया।
एबीवीपी की ओर से आरोप लगाया गया कि एसएफआई समेत वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े समर्थकों ने उसके कार्यकर्ताओं पर हमला किया।
इसके बाद एबीवीपी समर्थकों के विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचने की बात सामने आई। आरोप है कि वहां उन्होंने एसएफआई और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों के समर्थकों के साथ मारपीट की।
इस तरह दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर हमले के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल किसी एक पक्ष के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा और स्थिति पर नजर रखी गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फिलहाल जादवपुर विश्वविद्यालय में स्थिति सामान्य है।
घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
जादवपुर विश्वविद्यालय लंबे समय से छात्र राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े छात्र संगठनों के बीच मतभेद और टकराव समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
ताजा घटना ने एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विवाद को लेकर क्या कदम उठाता है और क्या घटना की औपचारिक जांच की जाती है।
विश्वविद्यालय परिसर लोकतांत्रिक बहस और वैचारिक मतभेद का स्थान है, लेकिन मतभेद का हिंसक टकराव में बदलना चिंता का विषय है। जादवपुर विश्वविद्यालय में हुई घटना में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले के आरोप लगाए हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच के बिना किसी एक पक्ष को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
बेबाक24 का मानना है कि छात्र संगठनों को अपनी राजनीतिक और वैचारिक असहमति लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज करनी चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन को भी विवाद की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए, ताकि परिसर में बहस की जगह हिंसा न ले।
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