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रामदास अठावले के ऑफर पर अभिजीत दीपके का पलटवार, बोले- ‘अभी एक महीने पहले तो मैं एंटी-नेशनल था?’

by on | 2026-08-19 15:06:36

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रामदास अठावले के ऑफर पर अभिजीत दीपके का पलटवार, बोले- ‘अभी एक महीने पहले तो मैं एंटी-नेशनल था?’

मुंबई | बेबाक24 न्यूज़

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले की ओर से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) में शामिल होने का न्योता मिलने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रतिक्रिया दी है। दीपके ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए अठावले के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए अपने पुराने राजनीतिक विवाद की ओर इशारा किया।

दीपके ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, “अभी एक महीने पहले तो मैं तुम्हारे लिए एंटी-नेशनल था?” उनके इस बयान को अठावले के ताजा प्रस्ताव पर तंज के तौर पर देखा जा रहा है।

अठावले ने दीपके को क्या ऑफर दिया?

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने हाल में कहा था कि अभिजीत दीपके को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) में शामिल होना चाहिए। उन्होंने इसे डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों और सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूत करने की दिशा में कदम बताया।

अठावले के मुताबिक, दीपके के पार्टी से जुड़ने से संगठन को मजबूती मिल सकती है और आंबेडकर के सामाजिक न्याय से जुड़े लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आरक्षण के मुद्दे पर भी अठावले ने रखी बात

अठावले ने इस दौरान आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आरक्षण संविधान से मिला अधिकार है और इसे समाप्त करने की मांग करने वालों के खिलाफ सरकार को सख्त रुख अपनाना चाहिए।

उनके बयान का व्यापक संदर्भ सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा था।

दीपके के जवाब में क्यों है राजनीतिक संदेश?

अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं मानी जा रही। उनके सवाल में पहले और अब के राजनीतिक रुख के बीच विरोधाभास की ओर संकेत है।

दीपके का यह कहना कि “अभी एक महीने पहले तो मैं तुम्हारे लिए एंटी-नेशनल था?” बताता है कि वह अठावले के मौजूदा प्रस्ताव को लेकर पुराने आरोप या बयान को याद दिलाना चाहते हैं।

हालांकि, उनके इस तंज से यह स्पष्ट नहीं होता कि वह अठावले के प्रस्ताव को स्वीकार करने वाले हैं या उसे सीधे खारिज कर रहे हैं।

अब नजर दीपके के अगले कदम पर

अठावले के प्रस्ताव और दीपके की प्रतिक्रिया के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या दोनों के बीच आगे कोई औपचारिक बातचीत होती है। फिलहाल दीपके ने पार्टी में शामिल होने को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है।

इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोशल मीडिया पर दिया गया उनका जवाब किसी राजनीतिक गठजोड़ की शुरुआत है या सिर्फ पुराने विवाद पर किया गया व्यंग्यात्मक पलटवार।

बेबाक24 का नजरिया

रामदास अठावले का प्रस्ताव और अभिजीत दीपके का जवाब दोनों मिलकर एक दिलचस्प राजनीतिक स्थिति सामने रखते हैं। अठावले जहां दीपके को सामाजिक न्याय की राजनीति से जोड़ने की बात कर रहे हैं, वहीं दीपके ने अपने पुराने मतभेद की याद दिलाकर सवाल खड़ा कर दिया है।

बेबाक24 का मानना है कि राजनीति में किसी व्यक्ति को लेकर रुख बदलना अपने आप में असामान्य नहीं है, लेकिन ऐसे बदलाव की वजह और राजनीतिक संदर्भ साफ होना जरूरी है। अब देखना होगा कि दीपके का यह जवाब यहीं तक सीमित रहता है या आगे किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का संकेत बनता है।



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