ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
राजनीति राजनीति

आज़म खान से जुड़े 10 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में कार्रवाई

by on | 2026-08-19 14:46:02

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3102


आज़म खान से जुड़े 10 ठिकानों पर ईडी की छापेमारी, जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में कार्रवाई

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया है।

अधिकारियों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के साथ दिल्ली में भी करीब 10 परिसरों की तलाशी ली जा रही है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत दर्ज मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट  के प्रावधानों के तहत की जा रही है।

किन जगहों पर चल रही है तलाशी?

ईडी की कार्रवाई उत्तर प्रदेश के रामपुर और सहारनपुर के अलावा दिल्ली तक फैली हुई है। जांच एजेंसी की टीमें संबंधित परिसरों में दस्तावेजों और अन्य सामग्री की जांच कर रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, तलाशी का केंद्र मुख्य रूप से मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों से संबंधित गतिविधियां हैं।

आज़म खान और जौहर ट्रस्ट का क्या संबंध है?

मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का मुख्यालय लखनऊ में है और आज़म खान इसके मुख्य ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट में उनके परिवार के कुछ सदस्य और करीबी सहयोगी भी जुड़े हुए हैं।

इसी ट्रस्ट के माध्यम से रामपुर में मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और एक पब्लिक स्कूल का संचालन किया जाता है। जौहर यूनिवर्सिटी आज़म खान की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से लंबे समय से जुड़ी रही है।

PMLA के तहत क्या हो रही है कार्रवाई?

ईडी की यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज मामले से जुड़ी है। एजेंसी आम तौर पर ऐसे मामलों में उन वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और दस्तावेजों की जांच करती है जिन पर कथित तौर पर अपराध से प्राप्त धन के इस्तेमाल या उसे वैध दिखाने का संदेह हो।

फिलहाल ईडी की तलाशी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ है और जांच में आगे क्या निष्कर्ष सामने आए हैं, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

आगे क्या हो सकता है?

तलाशी के बाद ईडी जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक या वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण कर सकती है। जांच के आधार पर एजेंसी आगे पूछताछ, बयान दर्ज करने या कानून के तहत अन्य कार्रवाई का निर्णय ले सकती है।

फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ईडी की छापेमारी अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करती। जांच जारी है और आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।

बेबाक24 का नजरिया

आज़म खान से जुड़े जौहर ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी के परिसरों पर ईडी की कार्रवाई राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित करने के बजाय जांच में सामने आने वाले दस्तावेज और वित्तीय सबूत ज्यादा अहम होंगे।

बेबाक24 का मानना है कि जांच एजेंसियों को कार्रवाई में पारदर्शिता रखनी चाहिए और यदि वित्तीय अनियमितता के ठोस प्रमाण मिलते हैं तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। वहीं, जब तक अदालत में आरोप साबित न हों, किसी भी व्यक्ति को दोषी मानना उचित नहीं है।



Search
Recent News
Popular News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment