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निर्मला सीतारमण सिंगापुर रवाना, चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में आर्थिक साझेदारी पर मंथन

by admin@bebak24.com on | 2026-08-19 13:27:18

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निर्मला सीतारमण सिंगापुर रवाना, चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में आर्थिक साझेदारी पर मंथन

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को सिंगापुर के लिए रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल चौथे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (ISMR) में हिस्सा लेगा। बैठक 19 और 20 अगस्त को आयोजित हो रही है और इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना तथा सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी शामिल हैं।

2022 में शुरू हुआ था यह संवाद

भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन की शुरुआत 2022 में हुई थी। यह दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय आर्थिक संवाद का प्रमुख मंच है, जहां पिछली बैठकों में हुई प्रगति की समीक्षा के साथ नए सहयोग क्षेत्रों पर चर्चा की जाती है।

इस तंत्र का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि भारत और सिंगापुर के व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक, तकनीकी और निवेश के क्षेत्र में और गहरा करना है।

6 प्रमुख क्षेत्रों पर होगी बातचीत

चौथे गोलमेज सम्मेलन में दोनों पक्ष 6 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। इनमें उन्नत विनिर्माण, संपर्क व्यवस्था, डिजिटलीकरण, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, कौशल विकास और स्थिरता शामिल हैं। ये वे क्षेत्र हैं जिन्हें दोनों देशों ने पिछले दौर की बैठकों में भी सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना है।

इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से निवेश, तकनीकी साझेदारी, कौशल प्रशिक्षण और औद्योगिक विकास के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

पिछली बैठकों में भी सामने आए थे नए सहयोग के क्षेत्र

भारत-सिंगापुर वार्ता के पिछले दौर में डिजिटल संपर्क, कौशल विकास, स्थिरता और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों के साथ उन्नत विनिर्माण और संपर्क व्यवस्था को भी सहयोग के नए स्तंभों के रूप में जोड़ा गया था। दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण और टिकाऊ औद्योगिक पार्कों जैसे विषयों पर भी चर्चा की थी।

ऐसे में इस बार की बैठक में पहले से चल रहे सहयोग की समीक्षा के साथ उन क्षेत्रों में ठोस प्रगति पर जोर रहने की उम्मीद है।

भारत के लिए सिंगापुर क्यों महत्वपूर्ण?

सिंगापुर दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय क्षेत्र में लंबे समय से सहयोग बढ़ा है।

भारत-सिंगापुर संबंधों में यूपीआई और सिंगापुर के पे-नाउ के बीच जुड़ाव भी डिजिटल सहयोग का एक प्रमुख उदाहरण है, जिसे 2023 में शुरू किया गया था।

इस पृष्ठभूमि में गोलमेज सम्मेलन का महत्व केवल मंत्रियों की बैठक तक सीमित नहीं है। इसके जरिए निवेश और कारोबार के लिए आगे की प्राथमिकताएं तय करने का प्रयास किया जा रहा है।

कारोबार और निवेश पर भी नजर

वित्त मंत्री की यात्रा के दौरान आर्थिक और व्यावसायिक संपर्क को बढ़ाने पर भी जोर रहने की उम्मीद है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बनाती है। गोयल 19 से 21 अगस्त तक सिंगापुर में चौथे ISMR के साथ भारत-सिंगापुर बिजनेस राउंडटेबल से भी जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

ऐसे में बैठक के दौरान सरकारी संवाद के साथ कारोबारी जगत के लिए नए निवेश अवसरों और सहयोग की संभावनाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।

बेबाक24 का नजरिया

चौथा भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर, कौशल, स्वास्थ्य और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में तेजी से सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।

बेबाक24 का मानना है कि इस बैठक की असली सफलता घोषणाओं की संख्या से नहीं, बल्कि निवेश, तकनीक और रोजगार से जुड़े ठोस समझौतों में दिखेगी। भारत के लिए सिंगापुर केवल कारोबारी साझेदार नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया तक आर्थिक और रणनीतिक पहुंच का एक महत्वपूर्ण सेतु भी है।



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