ब्रेकिंग न्यूज़
झांसी हादसे में छोटे बेटे अबान की मौत, कसारी-मसारी में पिता-चाचा की कब्रों के पास ही होगा सुपुर्द-ए-खाक
अंतरराष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय

तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर सस्पेंस, मोदी ने दिया सम्मान का भरोसा; हसीना मुद्दा बना बड़ी अड़चन

by admin@bebak24.com on | 2026-08-19 12:37:28

Share: Facebook | Twitter | WhatsApp | LinkedIn Visits: 3088


तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर सस्पेंस, मोदी ने दिया सम्मान का भरोसा; हसीना मुद्दा बना बड़ी अड़चन

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में जारी तनाव के बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के संभावित भारत दौरे को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है। भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि रहमान की भारत यात्रा यादगार हो और दोनों देशों के नेताओं के बीच सीधी बातचीत हो।

भारत की ओर से यह संदेश ऐसे समय आया है जब शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर नई दिल्ली और ढाका के बीच मतभेद बने हुए हैं। इसी वजह से रहमान की प्रस्तावित दिल्ली यात्रा को लेकर अनिश्चितता भी सामने आई है।

मोदी का संदेश- दोनों नेताओं की मुलाकात जरूरी

भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का संदेश स्पष्ट है कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को मिलना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि अगर तारिक रहमान भारत आते हैं तो उनका सम्मानजनक स्वागत किया जाएगा।

त्रिवेदी के मुताबिक, भारत मानता है कि दोनों नेताओं के बीच सीधा संवाद आगे बढ़ने का रास्ता खोल सकता है। उन्होंने कहा कि मजबूत भारत-बांग्लादेश संबंधों का लाभ दोनों देशों के आम लोगों और कारोबारी समुदाय को मिल सकता है।

आपसी भरोसे पर रिश्ते सुधारने का जोर

भारत ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के संबंधों को केवल मौजूदा विवादों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। त्रिवेदी ने अतीत के मतभेदों को सुलझाकर आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया।

उनका कहना है कि लोकतांत्रिक देशों के बीच मतभेद होना असामान्य नहीं है, लेकिन बातचीत और लगातार संपर्क के जरिए उन्हें सुलझाया जा सकता है। भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा मुश्किलों को पूरे द्विपक्षीय रिश्ते को नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

हसीना के प्रत्यर्पण पर अटका मामला

भारत-बांग्लादेश रिश्तों में सबसे संवेदनशील मुद्दा फिलहाल पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण है। ढाका लगातार नई दिल्ली से हसीना को सौंपने की मांग कर रहा है, जबकि भारत का कहना है कि इस अनुरोध पर स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है।

हाल में हसीना की भारत से हुई सार्वजनिक मीडिया बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच बयानबाजी बढ़ी है। बांग्लादेश ने इस कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है और इसे अपने आंतरिक मामलों तथा द्विपक्षीय संबंधों के संदर्भ में संवेदनशील बताया है।

क्या रहमान दिल्ली आएंगे?

तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा को BRICS शिखर सम्मेलन से भी जोड़ा जा रहा था। हालांकि, यात्रा को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं रही है और ढाका की ओर से अनुकूल माहौल की जरूरत की बात सामने आई है।

भारत की ओर से रहमान को दिल्ली आने का निमंत्रण दिए जाने की पुष्टि पहले भी हुई है। भारतीय उच्चायुक्त ने प्रधानमंत्री मोदी को बांग्लादेशी नेतृत्व के साथ अपनी बातचीत के बाद स्थिति से अवगत कराया था।

व्यापार और युवाओं पर भी भारत की नजर

भारत की कोशिश केवल राजनीतिक रिश्ते सुधारने तक सीमित नहीं दिखती। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

भारतीय पक्ष का मानना है कि कारोबारी संपर्क और लोगों के बीच बढ़ता जुड़ाव राजनीतिक मतभेदों के बावजूद रिश्तों को स्थिर रखने में भूमिका निभा सकता है।

यही वजह है कि नई दिल्ली की रणनीति में संवाद के साथ आर्थिक और जनस्तरीय संपर्क को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे की राह आसान नहीं

भारत की ओर से सम्मानजनक स्वागत और बातचीत का संदेश दिया गया है, लेकिन ढाका की अपनी प्राथमिकताएं हैं। शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा वहां की राजनीति में बेहद संवेदनशील है और इसी कारण तारिक रहमान की भारत यात्रा का रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हुआ है।

इस बीच दोनों देशों के लिए चुनौती यह है कि वे हसीना विवाद को व्यापक भारत-बांग्लादेश संबंधों पर हावी होने से रोकें और व्यापार, सुरक्षा, सीमा, जल तथा क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर संवाद बनाए रखें।

बेबाक24 का नजरिया

तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर नई दिल्ली का संदेश फिलहाल स्पष्ट है—तनाव के बावजूद संवाद का दरवाजा बंद नहीं किया जाएगा। लेकिन ढाका के लिए शेख हसीना का मुद्दा केवल कूटनीतिक विवाद नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति से भी जुड़ा है। यही इस यात्रा की सबसे बड़ी पेचीदगी है।

बेबाक24 का मानना है कि दोनों देशों के रिश्ते किसी एक नेता या एक विवाद से बड़े हैं। हसीना के प्रत्यर्पण पर कानूनी प्रक्रिया अपनी जगह चलती रहनी चाहिए, लेकिन भारत और बांग्लादेश को राजनीतिक मतभेदों के बावजूद बातचीत, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग की राह खुली रखनी होगी।



Search
Recent News
Popular News
Top Trending
Most Popular

Leave a Comment