by admin@bebak24.com on | 2026-08-19 12:20:19
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नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़
जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस ने जनगणना के प्रस्तावित सवालों और खासकर जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जाति से जुड़ा सवाल जिस तरह तैयार किया गया है, वह जानबूझकर गलत है।
कांग्रेस ने धर्म, जन्मतिथि और माता-पिता के जन्मस्थान जैसी जानकारियां जुटाए जाने के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि इतनी विस्तृत व्यक्तिगत जानकारी पहले की जनगणना में इस तरह नहीं मांगी गई थी।
कांग्रेस का मुख्य विरोध जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर है।
जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्तावित प्रारूप में जाति बताने के लिए खुला विकल्प रखा गया है। इसके साथ ही व्यक्ति के पास ‘जाति नहीं बताना चाहते’ और ‘कोई जाति नहीं’ जैसे विकल्प भी होने की बात सामने आई है।
रमेश का सवाल है कि जब केंद्र सरकार ने पहले स्वयं जातियों का विश्वसनीय आंकड़ा जुटाने के लिए तकनीकी व्यवस्था का सुझाव दिया था, तो 2027 की जनगणना में वैसा विकल्प क्यों नहीं रखा गया।
कांग्रेस ने अपने आरोपों के समर्थन में 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे का हवाला दिया है।
जयराम रमेश के अनुसार, हलफनामे के एक हिस्से में जातियों का रजिस्टर तैयार करने के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू का सुझाव दिया गया था। कांग्रेस का तर्क है कि इस तरह की व्यवस्था से जातियों का अपेक्षाकृत व्यवस्थित और भरोसेमंद आंकड़ा तैयार किया जा सकता था।
अब पार्टी सवाल उठा रही है कि जब सरकार ने 2021 में स्वयं इस व्यवस्था को उपयोगी बताया था, तो जनगणना 2027 के प्रारूप में इसे शामिल क्यों नहीं किया गया।
कांग्रेस ने जनगणना में धर्म, जन्मतिथि और माता-पिता के जन्मस्थान जैसी जानकारी दर्ज किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
जयराम रमेश ने दावा किया कि माता-पिता दोनों के धर्म, जन्मतिथि और जन्मस्थान जैसी विस्तृत जानकारी गांव स्तर तक दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस का कहना है कि इतनी बारीक जानकारी जुटाए जाने का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।
रमेश ने जनगणना की गोपनीयता का उल्लेख करते हुए सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए और इसके पीछे ‘गहरा और बुरा मकसद’ होने का आरोप लगाया।
जाति आधारित जनगणना का मुद्दा कांग्रेस लंबे समय से उठाती रही है। पार्टी ने पहले भी आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार जातिगत आंकड़े जुटाने को लेकर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही है।
कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अप्रैल 2025 को जाति जनगणना कराने की घोषणा करके अपना पुराना रुख बदला था। अब पार्टी का आरोप है कि जनगणना का प्रारूप तैयार करते समय सरकार उसी मुद्दे पर फिर पीछे हटती दिखाई दे रही है।
कांग्रेस के मुताबिक, जाति के आंकड़ों की विश्वसनीयता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट और वैज्ञानिक है।
कांग्रेस की आपत्तियों को मुख्य रूप से दो हिस्सों में देखा जा सकता है। पहला, जाति की पहचान और उसका आंकड़ा तैयार करने की प्रक्रिया, और दूसरा, जनगणना में दर्ज की जाने वाली व्यक्तिगत जानकारियों का दायरा।
पार्टी चाहती है कि सरकार स्पष्ट करे कि जातिगत जानकारी किस तरीके से दर्ज होगी, आंकड़ों की शुद्धता कैसे सुनिश्चित की जाएगी और व्यक्तिगत सूचनाओं की गोपनीयता किस तरह सुरक्षित रखी जाएगी।
फिलहाल सरकार की ओर से इन राजनीतिक आरोपों पर विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है। जनगणना 2027 के सवालों और प्रक्रिया को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।
जनगणना देश के सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों का आधार तैयार करती है, इसलिए इसमें पूछे जाने वाले सवाल और आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया दोनों बेहद महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस का यह सवाल गंभीर है कि जाति जैसे संवेदनशील आंकड़े किस पद्धति से दर्ज किए जाएंगे और उनकी विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित होगी।
बेबाक24 का मानना है कि जनगणना के प्रारूप को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा जरूरी है कि सरकार हर सवाल का उद्देश्य, आंकड़ा संग्रह की प्रक्रिया और गोपनीयता के प्रावधान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे। जाति जनगणना का आंकड़ा तभी उपयोगी होगा, जब उसे लेकर प्रक्रिया पर व्यापक भरोसा हो।
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