बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए करीब 11 साल से पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग की कमान संभाल रहे अमित मालवीय को इस जिम्मेदारी से हटा दिया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग का प्रमुख बनाया गया है।
हालांकि, बीजेपी ने मालवीय को हटाने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठनात्मक बदलाव के तौर पर पेश किया गया है। लेकिन नियुक्ति की टाइमिंग ने राजनीतिक और डिजिटल रणनीति से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या हालिया युवा आंदोलन बना वजह?
अमित मालवीय को हटाए जाने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब हाल के छात्र और जेन-ज़ी आंदोलनों में सोशल मीडिया की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। प्रदर्शनकारियों ने इंस्टाग्राम, रील्स और अन्य डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल तेजी से किया और बीजेपी के पारंपरिक सोशल मीडिया नैरेटिव को चुनौती दी।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी अब अपनी डिजिटल रणनीति को नए सिरे से तैयार करना चाहती है। खासकर युवा मतदाताओं और इंस्टाग्राम-केंद्रित डिजिटल दर्शकों तक पहुंच बढ़ाना पार्टी की प्राथमिकता बन सकता है।
बीजेपी की सोशल मीडिया रणनीति पर उठे थे सवाल
मालवीय के कार्यकाल के दौरान बीजेपी का आईटी सेल विपक्ष के खिलाफ आक्रामक डिजिटल अभियान और पार्टी के पक्ष में नैरेटिव तैयार करने के लिए जाना गया। हालांकि, हाल के महीनों में पार्टी की सोशल मीडिया रणनीति को लेकर अंदर से भी सवाल उठे।
आरएसएस से जुड़े विचारक रतन शारदा ने हालिया छात्र आंदोलन के दौरान बीजेपी की मीडिया और आईटी टीम की आलोचना की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी दूसरे पक्ष से बने नैरेटिव का जवाब देने में ही उलझी रही और खुद प्रभावी नैरेटिव बनाने में पीछे रह गई।
यानी सवाल केवल किसी एक व्यक्ति के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि बीजेपी की पूरी डिजिटल संचार रणनीति में बदलाव की जरूरत का भी माना जा रहा है।
अब दीपक म्हस्के की रणनीति क्या होगी?
मालवीय की जगह जिम्मेदारी संभालने वाले दीपक म्हस्के की पृष्ठभूमि चुनावी डेटा और अकादमिक क्षेत्र से जुड़ी रही है। वह केमिस्ट्री के प्रोफेसर भी रह चुके हैं और बीजेपी संगठन में काम कर चुके हैं।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद म्हस्के ने संकेत दिया है कि बीजेपी युवाओं तक पहुंचने के लिए इंस्टाग्राम, रील्स और प्लेटफॉर्म-विशिष्ट संदेश पर ज्यादा जोर देगी। साथ ही गलत सूचनाओं का जवाब देने और लोगों की गलत धारणाओं को दूर करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इससे संकेत मिलता है कि पार्टी अब केवल पारंपरिक राजनीतिक संदेशों के बजाय डेटा, शॉर्ट-फॉर्म वीडियो और अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के हिसाब से तैयार सामग्री पर ज्यादा जोर दे सकती है।
क्या मालवीय के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई?
इस सवाल का जवाब फिलहाल नहीं है। बीजेपी ने मालवीय को पद से हटाने को किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई या सजा के तौर पर पेश नहीं किया है।
मालवीय ने भी नई जिम्मेदारी पाने वाले दीपक म्हस्के को बधाई दी और अपने करीब 11 साल के कार्यकाल के दौरान पार्टी समर्थकों से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उनके बयान से भी ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता कि उन्हें पार्टी से अलग किया गया है।
विपक्ष ने क्या कहा?
मालवीय के पद से हटने के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे बीजेपी की डिजिटल रणनीति की विफलता से जोड़कर देखा। कुछ नेताओं ने मालवीय पर गलत सूचनाओं, ट्रोलिंग और कांग्रेस विरोधी अभियान चलाने के आरोप भी लगाए।
हालांकि, ये विपक्षी नेताओं और आलोचकों के आरोप हैं, बीजेपी की ओर से मालवीय को हटाने का आधिकारिक कारण नहीं।
11 साल बाद बदलाव का असली मतलब क्या?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीजेपी ने मालवीय को हटाने का कारण सार्वजनिक नहीं किया है, इसलिए यह कहना कि उन्हें केवल जेन-ज़ी आंदोलन या किसी एक घटना की वजह से हटाया गया, फिलहाल अटकल होगी।
लेकिन घटनाक्रम को जोड़कर देखें तो तस्वीर जरूर दिलचस्प है। बीजेपी एक ऐसे दौर में अपनी डिजिटल रणनीति बदल रही है, जब इंस्टाग्राम और रील्स जैसे प्लेटफॉर्म राजनीतिक संवाद के बड़े माध्यम बन चुके हैं और युवा वर्ग पारंपरिक सोशल मीडिया रणनीतियों से अलग तरीके से राजनीतिक सामग्री देखता और साझा करता है।
इसलिए दीपक म्हस्के की नियुक्ति को सिर्फ चेहरा बदलने के बजाय बीजेपी के डिजिटल अभियान को डेटा-आधारित, युवा-केंद्रित और प्लेटफॉर्म-विशिष्ट बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या बीजेपी मालवीय के दौर की आक्रामक सोशल मीडिया रणनीति को जारी रखेगी, या म्हस्के के नेतृत्व में पार्टी डिजिटल राजनीति का नया मॉडल तैयार करेगी?