नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़
संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामे और नारेबाजी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद सदन में चर्चा करने के बजाय हंगामा और नारेबाजी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार विपक्ष से संसद में आने और मुद्दों पर चर्चा करने की अपील कर रही है, लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है। रिजिजू ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस सांसदों का एक समूह ऐसा है, जिसका काम केवल हंगामा करना और अपशब्दों का इस्तेमाल करना रह गया है।
‘सांसद का काम हंगामा करना नहीं’
रिजिजू ने कहा कि अगर कोई सांसद सिर्फ हंगामा करना चाहता है तो उसके लिए संसद में आने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने विपक्ष से सदन में बहस और चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की।
उनके मुताबिक, सरकार सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष ने पहले ही यह तय कर लिया था कि उसे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देनी है।
अमित शाह के बयान की मांग पर भी कांग्रेस को घेरा
कांग्रेस की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग पर रिजिजू ने कहा कि विपक्ष संसद का सामना करने से बच रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार सवालों का जवाब देने और संबंधित मुद्दों पर जानकारी देने के लिए तैयार थी, लेकिन कांग्रेस ने चर्चा से दूरी बना ली।
रिजिजू ने कहा कि कुछ कांग्रेस सांसद उनसे संसद चलाने के लिए कदम उठाने की बात करते हैं, लेकिन उन्हें राहुल गांधी से बात करनी चाहिए। उनका आरोप है कि कांग्रेस के कई सांसद वही कर रहे हैं, जो राहुल गांधी कहते हैं।
‘राहुल गांधी ने ब्रिगेड बना रखी है’
रिजिजू ने राहुल गांधी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने ऐसी ‘ब्रिगेड’ तैयार कर रखी है, जिसका काम हंगामा और नारेबाजी करना है।
उन्होंने कहा कि जो कांग्रेस सांसद वास्तव में अपनी बात सदन में रखना चाहते हैं, उन्हें भी नारेबाजी करने वाले सांसदों के पीछे खड़ा होना पड़ रहा है। रिजिजू के मुताबिक, यह संसदीय लोकतंत्र के लिए अच्छी स्थिति नहीं है।
राहुल गांधी की भूमिका पर उठाया सवाल
रिजिजू ने कहा कि उन्हें राहुल गांधी से व्यक्तिगत समस्या नहीं है और दोनों के बीच बातचीत भी होती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद की अपनी गरिमा और जिम्मेदारी है और राहुल गांधी को उसी के अनुरूप सदन में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर राहुल गांधी की टिप्पणियों पर भी रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने की कोशिश की, लेकिन अंततः इससे उनकी अपनी छवि को नुकसान पहुंचा।
‘दिमागी नक्सल’ विवाद पर क्या बोले रिजिजू?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर चल रहे विवाद पर भी रिजिजू ने कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विचारधारा में माओवादी और नक्सली सोच का प्रभाव दिखाई दे रहा है।
रिजिजू ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती रहे हैं। उनके मुताबिक, सुरक्षा बलों की कार्रवाई से हथियारबंद नक्सलवाद को काफी हद तक कमजोर किया गया है, लेकिन सरकार का मानना है कि ऐसी विचारधारा का प्रभाव शहरी क्षेत्रों में भी मौजूद हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ से उनका आशय उन लोगों से है, जो देश को विभाजित करने की बात करते हैं, अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं या पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की मांग करते हैं।
कांग्रेस की विचारधारा पर सीधा हमला
रिजिजू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस धीरे-धीरे ऐसी विचारधारा की ओर बढ़ रही है, जो देश की एकता और सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि नक्सली हिंसा में मारे गए सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों के प्रति ऐसी विचारधारा रखने वालों में संवेदना नहीं होती।
हालांकि, रिजिजू के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आना इस विवाद को और बढ़ा सकता है।
संसद में टकराव बढ़ने के संकेत
मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच मुद्दों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। एक ओर सरकार विपक्ष पर सदन नहीं चलने देने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त जवाबदेही से बचने का आरोप लगाता रहा है।
ऐसे में संसद की कार्यवाही के साथ-साथ अब ‘दिमागी नक्सल’ जैसे राजनीतिक शब्दों को लेकर चल रही बहस भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव का नया मुद्दा बन गई है।