रांची | बेबाक24 न्यूज़
झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल समाप्त हो गया है, लेकिन CBI जांच की मांग अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से परीक्षाओं को लेकर फैसले और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिए जाने के बाद आंदोलनकारियों ने अनशन समाप्त किया। हालांकि, सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने के बजाय राज्य की एजेंसी और गठित समिति के जरिए जांच आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
सरकार के इस रुख पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जब छात्र लगातार CBI जांच की मांग कर रहे थे, तो राज्य सरकार ने केंद्रीय एजेंसी को जांच क्यों नहीं सौंपी? झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने इसका जवाब देते हुए CBI की कार्यप्रणाली पर ही सवाल उठाए हैं।
सरकार ने क्या भरोसा दिया?
मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने छात्र नेताओं का अनशन समाप्त करवाने के बाद कहा कि सरकार छात्र आंदोलन और उनकी मांगों के प्रति शुरू से संवेदनशील रही है। उन्होंने दावा किया कि आंदोलनकारियों की ओर से उठाए गए मुद्दों को सरकार ने स्वीकार किया है और जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित करने की घोषणा पहले ही कर दी है। यह समिति सभी संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रस्ताव तैयार करेगी।
सरकार का दावा है कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
CBI जांच से सरकार क्यों पीछे?
CBI जांच को लेकर दीपिका पांडे सिंह ने केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उनका तर्क है कि CBI के पास पेपर लीक से जुड़े कई मामले पहले से लंबित हैं और इन मामलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं।
मंत्री के मुताबिक, 2015 से देशभर में पेपर लीक और परीक्षा में हेराफेरी की 152 घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि इनमें से कई मामलों में केंद्रीय एजेंसियां ठोस परिणाम देने में सफल नहीं रही हैं।
इसी आधार पर राज्य सरकार ने JPSC-JSSC से जुड़े मामलों की जांच राज्य की CID से कराने और इसके लिए समयसीमा तय करने की बात कही है।
90 दिन में आरोपपत्र दाखिल करने का दावा
दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने जांच को लेकर 90 दिन की समयसीमा निर्धारित की है। इस अवधि में आरोपपत्र दाखिल करने और मामलों की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने की कोशिश होगी।
सरकार का तर्क है कि केवल एजेंसी बदलना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच का परिणाम समयबद्ध तरीके से सामने आना चाहिए। इसी वजह से राज्य सरकार ने CID जांच को प्राथमिकता दी है।
आंदोलनकारियों की मुख्य मांग क्या थी?
JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित गड़बड़ियों की CBI से जांच शामिल थी।
लगातार विरोध और अनशन के बाद सरकार की ओर से परीक्षा से जुड़े फैसले और जांच का भरोसा दिया गया। इसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन CBI जांच की मांग पर पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य सरकार की ओर से गठित समिति और CID जांच कितनी जल्दी कार्रवाई पूरी करती है। छात्रों की नजर अब जांच की 90 दिन की समयसीमा, आरोपपत्र और आगे होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।
सरकार के सामने चुनौती यह भी है कि जांच को लेकर छात्रों का भरोसा कायम रहे और परीक्षा व्यवस्था में ऐसी गड़बड़ियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुधार लागू किए जाएं।