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बसपा का पूर्वांचल पर फोकस: पश्चिम के बाद आकाश आनंद करेंगे जनसभाएं, चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की तैयारी

by admin@bebak24.com on | 2026-08-18 12:12:29

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बसपा का पूर्वांचल पर फोकस: पश्चिम के बाद आकाश आनंद करेंगे जनसभाएं, चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की तैयारी

लखनऊ | बेबाक24 न्यूज़

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच बहुजन समाज पार्टी ने अपने संगठन और जनाधार को दोबारा मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रियता बढ़ाने के बाद अब पार्टी ने पूर्वांचल पर भी ध्यान केंद्रित करने की तैयारी की है। बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद सितंबर में पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में जनसभाएं कर सकते हैं।

पार्टी के स्तर पर इन कार्यक्रमों को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं और नेताओं की ओर से लगातार मांग सामने आने की बात कही जा रही है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि बसपा आगामी चुनाव से पहले उन क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना चाहती है, जहां कभी उसका मजबूत जनाधार रहा है।

25 अगस्त को जेवर में जनसभा

आकाश आनंद की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रियता भी जारी है। बसपा प्रमुख मायावती ने 25 अगस्त को नोएडा के जेवर में आकाश आनंद की जनसभा को मंजूरी दी है।

पार्टी की रणनीति में आकाश आनंद को खास भूमिका दी जा रही है। बसपा नेतृत्व को उम्मीद है कि उनकी युवा छवि जेनरेशन जेड के मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाने में मदद कर सकती है।

इसके साथ ही पार्टी अपने पारंपरिक मतदाताओं को विपक्षी दलों की ओर जाने से रोकने की कोशिश में भी जुटी है।

पूर्वांचल में फिर जमीन तलाश रही बसपा

पूर्वांचल कभी बसपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने इस क्षेत्र से 4 सीटों पर जीत हासिल की थी।

आजमगढ़ की लालगंज सीट से संगीता आजाद, गाजीपुर से अफजाल अंसारी, घोसी से अतुल राय और जौनपुर से श्याम सिंह यादव ने चुनाव जीता था।

इसी चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भी बसपा के कई उम्मीदवार विजयी हुए थे। सहारनपुर से हाजी फजलुर्रहमान, बिजनौर से मलूक नागर, नगीना से गिरीश चंद्र और अमरोहा से कुंवर दानिश अली ने जीत दर्ज की थी।

लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बसपा एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। इसके बाद पार्टी के सामने अपने पुराने राजनीतिक प्रभाव को वापस हासिल करने की चुनौती और बड़ी हो गई।

स्थानीय नेताओं को भी जिम्मेदारी

पूर्वांचल में संगठन को मजबूत करने के लिए बसपा के स्थानीय नेता भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। पार्टी से जुड़ी इंदु चौधरी क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में जुटी हैं।

पूर्व सांसद अतुल राय की सक्रियता को भी पार्टी के पूर्वांचली आधार को मजबूत करने की कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है।

पार्टी की कोशिश है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की सभाओं के साथ स्थानीय संगठन को भी सक्रिय किया जाए, ताकि चुनाव से पहले बूथ स्तर तक राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाई जा सकें।

बसपा के सामने सिर्फ चुनावी नहीं, अस्तित्व की चुनौती

2024 के लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खुलने के बाद बसपा के सामने राजनीतिक प्रभाव वापस हासिल करने की चुनौती है। फिलहाल लोकसभा में पार्टी का कोई सांसद नहीं है।

उत्तर प्रदेश में पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद विधानसभा में भी बसपा की स्थिति कमजोर हुई है। इसके अलावा राज्यसभा में पार्टी के प्रतिनिधित्व और राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे को लेकर भी चुनौतियां बनी हुई हैं।

ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव बसपा के लिए सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने का चुनाव नहीं होगा। पार्टी को अपना संगठन, पारंपरिक मतदाता आधार और राजनीतिक प्रासंगिकता—तीनों मजबूत करने होंगे।

आकाश आनंद की भूमिका क्यों अहम?

बसपा नेतृत्व आकाश आनंद को युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने वाले चेहरे के रूप में आगे कर रहा है। उनकी सभाओं और भाषणों के जरिए पार्टी पारंपरिक राजनीति से अलग युवा वर्ग के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद पूर्वांचल में उनकी सक्रियता बढ़ाना इसी रणनीति का अगला चरण माना जा रहा है।

अगर सितंबर में प्रस्तावित जनसभाएं होती हैं, तो इनके जरिए पार्टी अपने संगठन की जमीनी स्थिति का भी आकलन कर सकती है और चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।

बेबाक24 का नजरिया

बसपा के लिए पूर्वांचल में आकाश आनंद की सक्रियता सिर्फ जनसभाओं का कार्यक्रम नहीं है। 2024 में लोकसभा का खाता न खुलने के बाद पार्टी को उन क्षेत्रों में दोबारा राजनीतिक जमीन तैयार करनी है, जहां कभी उसका प्रभाव निर्णायक रहा था।

बेबाक24 का मानना है कि आकाश आनंद की युवा छवि बसपा को नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन सिर्फ बड़ी सभाओं से खोया जनाधार वापस नहीं आएगा। असली परीक्षा बूथ स्तर के संगठन, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं के साथ लगातार संपर्क की होगी।



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