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रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी बिल को मंजूरी, केजरीवाल ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

by on | 2026-08-08 15:40:39

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रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी बिल को मंजूरी, केजरीवाल ने पीएम मोदी पर साधा निशाना

नई दिल्ली | बेबाक24 न्यूज़

रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर संभावित अमेरिकी टैरिफ के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। अमेरिकी सीनेट द्वारा रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले एक विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए।

अमेरिकी सीनेट ने भारी बहुमत से पारित किया विधेयक

अमेरिकी सीनेट ने रूस और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से संबंधित विधेयक को 86-11 मतों से मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव का असर भारत और चीन जैसे उन देशों पर पड़ सकता है, जो रूस से बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद खरीदते हैं।

विधेयक का नाम बदलकर ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ किया गया है। प्रस्ताव के तहत रूस से जुड़े व्यापार पर कड़े आर्थिक उपायों और कुछ देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खुल सकता है।

अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस के साथ ऊर्जा कारोबार जारी रखने वाले देशों के जरिए मॉस्को को आर्थिक मदद मिलती है, जिससे यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर लगाए जा रहे दबाव का असर कम होता है।

केजरीवाल ने पीएम मोदी पर लगाए गंभीर आरोप

अमेरिकी सीनेट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर तीखी टिप्पणी की।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है और प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों को लगातार स्वीकार कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत के महत्वपूर्ण फैसलों में अमेरिका का प्रभाव बढ़ रहा है और इसका नुकसान देश को उठाना पड़ रहा है।

हालांकि, केजरीवाल के ये आरोप राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आए हैं। केंद्र सरकार की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने आना इस रिपोर्ट का हिस्सा नहीं है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला?

भारत लंबे समय से रूस से ऊर्जा खरीद को अपनी आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के संदर्भ में देखता रहा है। ऐसे में यदि अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करता है, तो इसका असर भारत के व्यापार और ऊर्जा लागत पर पड़ सकता है।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों के साथ-साथ रूस के साथ भारत के पुराने रणनीतिक संबंध भी इस मुद्दे को महत्वपूर्ण बनाते हैं। प्रस्ताव के आगे बढ़ने की स्थिति में नई दिल्ली को अपनी ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक हितों और विदेश नीति के बीच संतुलन बनाना पड़ सकता है।

अब आगे क्या होगा?

अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में आगे की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्ताव कानून का रूप लेता है या नहीं और भारत जैसे देशों पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना होगा।

फिलहाल अमेरिकी सीनेट का फैसला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।



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