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UPI पेमेंट पर सियासी घमासान, जयराम रमेश ने वित्त मंत्री के दावों को बताया 'भ्रामक'

by on | 2026-08-07 18:25:34

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UPI पेमेंट पर सियासी घमासान, जयराम रमेश ने वित्त मंत्री के दावों को बताया 'भ्रामक'

नई दिल्ली: UPI भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के MDR से जुड़े बयान पर सवाल उठाते हुए उनके तर्कों को ‘भ्रामक’ बताया है।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार UPI लेनदेन पर जीरो-MDR की मौजूदा कानूनी व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने वित्त मंत्री के तर्कों को कई ऐसे दावों पर आधारित बताया, जिन पर सवाल उठाए जा सकते हैं।

क्या कहा था वित्त मंत्री ने?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने MDR को लेकर कहा था कि यह शुल्क व्यापारियों पर लागू होता है, ग्राहकों पर सीधे नहीं। उन्होंने यह भी कहा था कि UPI और संबंधित सेवाओं से जुड़ी स्टीयरिंग कमेटी को अभी MDR पर अंतिम निर्णय लेना है।

वित्त मंत्री के मुताबिक, इस मुद्दे पर संसद में सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा की जा सकती थी।

जयराम रमेश ने उठाया उपभोक्ताओं पर असर का सवाल

जयराम रमेश ने वित्त मंत्री के इस तर्क पर आपत्ति जताई कि MDR का असर केवल व्यापारियों तक सीमित रहेगा।

उनका कहना है कि अगर व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत आती है तो वे उसे अपने उत्पादों और सेवाओं की कीमत में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में अप्रत्यक्ष रूप से इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर पड़ सकता है।

उन्होंने विशेष रूप से छोटे दुकानदारों, किराना कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी वालों का जिक्र करते हुए कहा कि ये वर्ग UPI भुगतान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है।

'UPI सार्वजनिक डिजिटल व्यवस्था है'

कांग्रेस नेता ने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया कि MDR के जरिए बैंकों और फिनटेक कंपनियों को UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और तकनीकी विकास में निवेश करने के लिए अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे।

जयराम रमेश का तर्क है कि UPI एक सार्वजनिक डिजिटल भुगतान व्यवस्था है और इसके संचालन तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।

उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी व्यापारियों या ग्राहकों पर सीधे शुल्क लगाए बिना इस व्यवस्था को आर्थिक रूप से समर्थन देने की स्थिति में है।

कानून में बदलाव को लेकर सवाल

जयराम रमेश ने सरकार के इस बयान को भी पर्याप्त नहीं माना कि MDR को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानूनी बदलाव भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10A के तहत जीरो-MDR की मौजूदा कानूनी सुरक्षा को खत्म कर सकता है। उनके मुताबिक, इसके बाद भविष्य में शुल्क लगाने का रास्ता सरकार के नोटिफिकेशन के जरिए खुल सकता है।

कांग्रेस नेता ने इस संशोधन के समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

संसद में चर्चा नहीं होने का आरोप

जयराम रमेश ने MDR से जुड़े बदलावों पर संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं होने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की ओर से चर्चा की मांग के बावजूद सरकार ने इस पर विस्तार से बहस नहीं होने दी और विधेयक को लोकसभा में ध्वनिमत के जरिए पारित करा दिया।

बेबाक24 टेक

UPI भारत के डिजिटल भुगतान ढांचे का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में MDR को लेकर किसी भी बदलाव का असर व्यापारियों, बैंकों, फिनटेक कंपनियों और संभावित रूप से उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

फिलहाल राजनीतिक बहस का केंद्र यह है कि UPI के बुनियादी ढांचे और सुरक्षा की लागत किस तरह पूरी की जाए और क्या इसके लिए व्यापारियों पर MDR लगाया जाना चाहिए। सरकार और विपक्ष के अलग-अलग तर्कों के बीच आने वाले समय में इस मुद्दे पर संसद और सार्वजनिक मंचों पर बहस और तेज होने की संभावना है।



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